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कैंसर के दर्द में अपनी तस्वीर खींचती रही महिला, अपने ही कैमरे से दिखाई दर्द और तकलीफ की पूरी कहानी

First Published Feb 4, 2021, 2:12 PM IST
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हटके डेस्क: 4 फरवरी को पूरी दुनिया में कैंसर डे मनाया जाता है। कैंसर जैसी बिमारी का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। ऐसे में लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने की जरुरत है। अमेरिका की रहने वाली अल्योना कोचेटकोवा नाम की महिला को जब  पता चला कि उसे कैंसर है, तो उसने खुद ही अपने कैमरे से अपनी तस्वीरें खींचकर लोगों के साथ शेयर की। अल्योना को 2017 में ब्रेस्ट कैंसर हो गया था। उसने अपने ट्रीटमेंट से लेकर कैंसर को मात देने का पूरा सफर तस्वीरों में कैद कर दुनिया के साथ साझा किया था। मार्च 2018 में अल्योना का ट्रीटमेंट पूरा हुआ था। अपनी कहानी उन्होंने लोगों को कुछ इस तरह बताई थी... 

कीमोथेरेपी के दौरान ऐसी कई रातें आती थी जब मैं सो नहीं पाती थी। तब अपने अपार्टमेंट की खिड़की से बाहर झांकते हुए सारी रात गुजर जाती थी। 

कीमोथेरेपी के दौरान ऐसी कई रातें आती थी जब मैं सो नहीं पाती थी। तब अपने अपार्टमेंट की खिड़की से बाहर झांकते हुए सारी रात गुजर जाती थी। 

मेरे आसपास सिर्फ दवाइयां और कैंसर की चर्चा। ट्यूमर ग्लास के बीच मैं जंग हारने लगी थी। लेकिन तस्वीरों के जरिये फिर से जीने का एक जज्बा अंदर आया। 

मेरे आसपास सिर्फ दवाइयां और कैंसर की चर्चा। ट्यूमर ग्लास के बीच मैं जंग हारने लगी थी। लेकिन तस्वीरों के जरिये फिर से जीने का एक जज्बा अंदर आया। 

रातों को अपने बेड पर पड़े हुए मैं सोचती थी कि क्या ये बीमारी मुझे निगल जाएगी? 

रातों को अपने बेड पर पड़े हुए मैं सोचती थी कि क्या ये बीमारी मुझे निगल जाएगी? 

फिर एक दिन मुझे मेरे बालों से हाथ धोना पड़ा। 

फिर एक दिन मुझे मेरे बालों से हाथ धोना पड़ा। 

मैं खाना तक नहीं खा पाती थी। इस वजह से पाइप के जरिये मुझे लिक्विड डायट दी जाती थी।  

मैं खाना तक नहीं खा पाती थी। इस वजह से पाइप के जरिये मुझे लिक्विड डायट दी जाती थी।  

मैं दिनभर प्रार्थना करती थी। थेरेपी के दौरान होने वाला दर्द अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।  

मैं दिनभर प्रार्थना करती थी। थेरेपी के दौरान होने वाला दर्द अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।  


थेरेपी के दौरान पूरा शरीर दर्द से टूटता था। ऐसे में अपने पैरों को दीवार पर चढ़ा कर  रखती थी। ताकि दर्द कम हो जाए। 
 


थेरेपी के दौरान पूरा शरीर दर्द से टूटता था। ऐसे में अपने पैरों को दीवार पर चढ़ा कर  रखती थी। ताकि दर्द कम हो जाए। 
 

अस्पताल के कैंसर वार्ड में अन्य मरीजों का दर्द देखने के बाद मुझे मेरी तकलीफ कम लगने लगती थी।  
 

अस्पताल के कैंसर वार्ड में अन्य मरीजों का दर्द देखने के बाद मुझे मेरी तकलीफ कम लगने लगती थी।  
 

घर आने पर अकेलापन और बीमारी के बीच की जद्दोजहत में परेशान हो जाया करती थी।  

घर आने पर अकेलापन और बीमारी के बीच की जद्दोजहत में परेशान हो जाया करती थी।  

इस बीच बहन की शादी भी हुई। उसकी तैयारी करने में खुद को बीजी कर लिया।  
 

इस बीच बहन की शादी भी हुई। उसकी तैयारी करने में खुद को बीजी कर लिया।  
 

मेरे पति ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मेरे साथ परिवार भी इस दर्द से गुजर रहा था।  

मेरे पति ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मेरे साथ परिवार भी इस दर्द से गुजर रहा था।  

अस्पताल में खिड़की से झांकती इस रौशनी ने ही कैंसर से लड़ने की ताकत भी दी और साहस भी। आप भी डरें नहीं, लड़ें।  

अस्पताल में खिड़की से झांकती इस रौशनी ने ही कैंसर से लड़ने की ताकत भी दी और साहस भी। आप भी डरें नहीं, लड़ें।  

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