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कोरोना के बीच एक और खतरनाक जानलेवा वायरस ने दी दस्तक, लगातार हो रही खरगोशों की मौत

First Published May 20, 2020, 4:39 PM IST
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मैक्सिको. कोरोना वायरस का कहर अभी थमा नहीं था। इसी बीच एक और खतरनाक जानलेवा वायरस से दस्तक दे दी। हालांकि, अभी तक इस वायरस का कहर खरगोशों पर ही पड़ा है। अमेरिका में इस वायरस की चपेट में आने से खरगोशों की लगातार मौत हो रही है। वायरस ने मार्च में न्यू मैक्सिको में दस्तक दी थी। अब यह टेक्सास, एरिजोना, कोलोराडो, कैलिफोर्निया, मैक्सिको जैसे शहरों में भी फैल चुका है। इस वायरस की चपेट में जंगली खरगोशों के साथ ही पालतु खरगोश भी चपेट में आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे हजारों खरगोशों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अभी स्पष्ट आंकड़े सामने नहीं आए हैं।

अमेरिका के कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, खरगोश में यह बीमारी हेमोरोजिक डिसीज वायरस टाइप-2 की वजह से होती है। हालांकि, यह खरगोश से इंसान या अन्य जानवरों में नहीं फैलती। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस वायरस का कोरोना वायरस से कोई लेना देना नहीं है। 
 

अमेरिका के कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, खरगोश में यह बीमारी हेमोरोजिक डिसीज वायरस टाइप-2 की वजह से होती है। हालांकि, यह खरगोश से इंसान या अन्य जानवरों में नहीं फैलती। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस वायरस का कोरोना वायरस से कोई लेना देना नहीं है। 
 

इस वायरस की चपेट में पहली बार उत्तरी अमेरिका के जंगली खरगोश आए। इससे पहले वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में घरेलु खरगोश किसी ना किसी वायरस की चपेट में आते रहे हैं। 

इस वायरस की चपेट में पहली बार उत्तरी अमेरिका के जंगली खरगोश आए। इससे पहले वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में घरेलु खरगोश किसी ना किसी वायरस की चपेट में आते रहे हैं। 

न्यू मैक्सिको में जानवरों के डॉक्टर राल्फ जिम्मेरमान ने बताया कि यह वायरस कहां से आया अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन बाहर से लाए गए खरगोश इस वायरस की वजह हो सकते हैं। 

न्यू मैक्सिको में जानवरों के डॉक्टर राल्फ जिम्मेरमान ने बताया कि यह वायरस कहां से आया अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन बाहर से लाए गए खरगोश इस वायरस की वजह हो सकते हैं। 

यह बीमारी सबसे पहले 2010 में फ्रांस में सामने आई थी। इसके बाद यह यूरोप, ऑस्ट्रेलिया में फैली। जिम्मेरमान ने बताया कि खरगोश की तस्करी होती रहती है। इसी वजह से यह वायरस आया है। 

यह बीमारी सबसे पहले 2010 में फ्रांस में सामने आई थी। इसके बाद यह यूरोप, ऑस्ट्रेलिया में फैली। जिम्मेरमान ने बताया कि खरगोश की तस्करी होती रहती है। इसी वजह से यह वायरस आया है। 

डॉक्टर ने बताया, जंगली खरगोश को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता। वायरस से संक्रमित होने से बहुत से खरगोश मर जाते हैं। जबकि कई खरगोश वायरस का सामना कर लेते हैं। इसकी वजह उनकी प्रतिरोधक क्षमता होती है। 
 

डॉक्टर ने बताया, जंगली खरगोश को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता। वायरस से संक्रमित होने से बहुत से खरगोश मर जाते हैं। जबकि कई खरगोश वायरस का सामना कर लेते हैं। इसकी वजह उनकी प्रतिरोधक क्षमता होती है। 
 

नेशनल वाइल्ड लाइफ हेल्थ सेंटर के मुताबिक, यह वायरस काफी खतरनाक है। यह जानलेवा भी है। यह शुष्क महीने के बाद कई महीनों तक जीवित रहता है। ठंडे मौसम में भी यह जीवित रहता है। यह खरगोश में उनके मांस या कीड़ों के जरिए भी एक दूसरे में फैल जाता है। 
 

नेशनल वाइल्ड लाइफ हेल्थ सेंटर के मुताबिक, यह वायरस काफी खतरनाक है। यह जानलेवा भी है। यह शुष्क महीने के बाद कई महीनों तक जीवित रहता है। ठंडे मौसम में भी यह जीवित रहता है। यह खरगोश में उनके मांस या कीड़ों के जरिए भी एक दूसरे में फैल जाता है। 
 

अमेरिका में करीब 30 लाख घरों में 67 लाख पालतू खरगोश हैं। यह वायरस घरेलू खरगोशों के लिए भी खतरा बन सकता है। यूरोप में इस वायरस की वैक्सीन मौजूद है। कृषि विभाग इसकी मंजूरी दे सकता है। 

अमेरिका में करीब 30 लाख घरों में 67 लाख पालतू खरगोश हैं। यह वायरस घरेलू खरगोशों के लिए भी खतरा बन सकता है। यूरोप में इस वायरस की वैक्सीन मौजूद है। कृषि विभाग इसकी मंजूरी दे सकता है। 

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