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चीन ने उठाए ये 12 ठोस कदम, जिनके सामने कोरोना ने भी मानी हार, अब पूरी दुनिया को लेनी चाहिए सीख
बीजिंग. जहां एक ओर पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में आ गई। हर तरफ से संक्रमण बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं, चीन जहां से यह वायरस निकला, ने स्थितियों पर काबू पा लिया है। चीन में कोरोना से अब तक 3200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शुरुआती दिनों में जहां हर रोज हजारों मामले सामने आ रहे थे, वहीं, अब ये सिमट कर सिर्फ दर्जनों पर आ गए हैं। 14 फरवरी को 1 दिन में 14 हजार मामले सामने आए थे, वहीं, 20 मार्च को सिर्फ 34 मामले सामने आए हैं। इसी तरह से मौत की संख्या देखें तो चीन में सबसे ज्यादा 150 लोगों की मौत 23 फरवरी को हुई थी। वहीं, 20 मार्च को सिर्फ 7 लोगों की मौत हुई। जनवरी-फरवरी में चीन ने जिन परिस्थितियों और कठिनाइयों का सामना कर इस भयावह महामारी पर काबू पाया है, वह हर देश के लिए एक मिसाल है। अन्य देशों को भी चीन से काफी कुछ सीखने की जरूरत है।
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चीन ने उठाए ये 12 कदम, जिनके सामने मात खा गया कोरोना-
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1- लॉकडाउन- चीन ने संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ ही लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। वुहान समेत 15 शहरों में आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाई। चीन ने जिस तरह से लॉकडाउन कर स्थिति पर काबू पाया, आज कई देश उस तरीके को अपना रहे हैं। कई देशों ने अपने बॉर्डर पर आवाजाही पर रोक लगा दी तो कई ने अन्य देश से आने वाले यात्रियों को बैन कर दिया। जनवरी मध्य में चीन में कई बड़े कदम उठाए थे। वुहान, जहां से पहला मामला सामने आया था, समेत हुबेई के 15 शहरों में आना जाना बंद कर दिया था। यहां करीब 6 करोड़ लोग घरों में कैद कर दिया गया।
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2- चीन ने मेडिकल सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित वुहान में 9 दिन 2 हजार बेड का अस्पताल बनाया। इस अस्पताल को बनाने में करीब 4000 मजदूरों ने काम किया। इसके अलावा 1000 मशानें भी लगाई गईं थीं। अस्पताल में इलाज के लिए 1400 डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया।
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3- वुहान में कोराना से निपटने के लिए 16 अस्थाई अस्पताल बनाए थे। ये अस्थाई अस्पताल स्टेडियम, म्यूजियम में बनाए गए थे। इन अस्थाई अस्पतालों को आईसोलेशन वार्ड के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया। हालांकि, स्थिति काबू होने के बाद इस महीने सभी को बंद कर दिया गया।
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4- यहां 49 मेडिकल टीमें तैनात की गईं। इनमें 42 हजार मेडिकल कर्मी थे। वुहान में ये मेडिकल कर्मी पूरे देश से बुलाए गए थे। मेडिकल कर्मियों ने अपनी मौत को दांव पर लगाकर इलाज किया। पूरी दुनिया में इनकी तारीफ हो रही है। हालांकि, इलाज के दौरान कई मेडिकल कर्मी संक्रमित भी हुए। इनमें से कई की जान भी चली गई।
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5- कोरोना वायरस टेस्ट करने के लिए पूरे देश में फ्री और आसानी से किट उपलब्ध कराई गई। इससे जांच कर लोगों ने खुद वा खुद हेल्थ सेंटरों में संपर्क किया।
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6- वायरस को फैलने से रोकने के लिए अस्पताल के वार्डों को पूरी तरह से बंद किया गया, जिससे संक्रमण अस्पताल के बाहर ना पहुंच पाए।
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7- चीन ने संक्रमित लोगों और उनके संपर्क को ट्रेस करने के लिए सर्वेलाइंस सिस्टम का इस्तेमाल किया। इस सिस्टम को 2012 में मर्स वायरस के फैलने के वक्त तैयार किया गया था।
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8- चीन में हेल्थ कर्मचारियों ने जाकर एक एक संक्रमित शख्स का पता लगाया। इसके बाद उन्हें जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं।
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9- चीन ने सभी गैर जरूरी अपॉइंटमेंट को रद्द कर दिया। इसके अलावा डॉक्टर ऑनलाइन उपलब्ध रहे। इन डॉक्टरों ने हर तरह से मरीजों को मदद उपलब्ध कराई। सिर्फ सीरियस मरीजों को ही इमरजेंसी सेवा मिली।
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10- जब चीन में लोग घरों में कैद थे, उन्हें खाने और दवाइयों से संबंधित कोई कमी नहीं होने दी।
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11- लोगों की कमी ना हो इसलिए हजारों अन्य लोगों को मदद के लिए लगाया गया। जैसे, हाईवे पर काम करने वाले लोग तापमान नापते दिखे, तो कहीं खाने की डिलीवरी करते।
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12- वुहान में लॉकडाउन के बावजूद यहां लोग एक दूसरे की मदद करते दिखे। यहां लोगों ने एक दूसरे को खाने के सामान या अन्य जरूरी सामान जैसे सैनिटाइजर जैसे सामान देकर भी मदद की।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की चीन की तारीफ: चीन में जनता के मूवमेंट पर लगी रोक काफी कारगार साबित हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन की तारीफ की है। साथ ही संक्रमण पर काबू पाने वाले प्रयासों को अद्वितीय और अभूतपूर्व बताया है।
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लेकिन सवाल यह है कि भीड़ और सोशल गैदरिंग को खत्म करके इस महामाारी से बचा जा सकता है। 16-30 जनवरी के बीच, इस दौरान एक हफ्ते का लॉकडाउन भी शामिल है, से संक्रमण के फैलने की दर में काफी कमी आई।
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