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2-3 नहीं बल्कि 70 हजार लोगों के साथ हुआ कोरोना वैक्सीन को लेकर फर्जीवाड़ा, मिली 3 डोज 3300 में

First Published Jan 30, 2021, 4:43 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी ने लोगों की ना सिर्फ जान ही ली बल्कि दुनियाभर के कइयों देश की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करके रख दिया था। ऐसे में लोगों को इसकी वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार था और वैक्सीनेशन प्रोग्राम की भारत समेत कई देशों में शुरुआत भी हो चुकी है। ऐसे में वैक्सीन के नाम पर कई बार ठगी और मनमानी के मामले सामने आ चुके हैं। अब दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर से खबर आ रही है कि वहां कम से कम 70 हजार लोगों के साथ वैक्सीन के नाम पर ठगी की गई। लगाई गई फर्जी वैक्सीन...

खबरों की मानें तो दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में कम से कम 70 हजार लोगों को फर्जी कोरोना वैक्सीन लगा दी गई। बताया जा रहा है कि एक प्राइवेट क्लिनिक कोरोना वैक्सीन लगाने के नाम पर मरीजों से एक डोज के करीब 1100 रुपए वसूल रहा था। कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित होने के लिए लोगों को तीन खुराक लगवाने को कहा जा रहा था। इसके मुताबिक तीन खुराक 3300 रुपए की हुई। 

खबरों की मानें तो दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में कम से कम 70 हजार लोगों को फर्जी कोरोना वैक्सीन लगा दी गई। बताया जा रहा है कि एक प्राइवेट क्लिनिक कोरोना वैक्सीन लगाने के नाम पर मरीजों से एक डोज के करीब 1100 रुपए वसूल रहा था। कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित होने के लिए लोगों को तीन खुराक लगवाने को कहा जा रहा था। इसके मुताबिक तीन खुराक 3300 रुपए की हुई। 

सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से खबरों में कहा जा रहा है कि फर्जी कोरोना वैक्सीन लगाने वाले क्लिनिक के स्टाफ लोगों से कहते थे कि तीन खुराक लेने के बाद ही लोग कोरोना से पूरी तरह इम्यून होंगे। अब तक स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि वैक्सीन के नाम से दिए जा रहे इंजेक्शन में कौन से पदार्थ का इस्तेमाल किया जा रहा था।

सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से खबरों में कहा जा रहा है कि फर्जी कोरोना वैक्सीन लगाने वाले क्लिनिक के स्टाफ लोगों से कहते थे कि तीन खुराक लेने के बाद ही लोग कोरोना से पूरी तरह इम्यून होंगे। अब तक स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि वैक्सीन के नाम से दिए जा रहे इंजेक्शन में कौन से पदार्थ का इस्तेमाल किया जा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अंडरकवर एजेंट ने क्लिनिक का एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में क्लिनिक चलाने वाली महिला डॉक्टर लुसिया पेनाफील बिना मास्क दिखती हैं और वो बताती हैं कि क्लिनिक के स्टाफ कोरोना से सुरक्षित हैं। उन्होंने ये भी बताया कि 70 हजार लोगों को यहां ट्रीटमेंट दिया गया है। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्लिनिक पर छापा मारा।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अंडरकवर एजेंट ने क्लिनिक का एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में क्लिनिक चलाने वाली महिला डॉक्टर लुसिया पेनाफील बिना मास्क दिखती हैं और वो बताती हैं कि क्लिनिक के स्टाफ कोरोना से सुरक्षित हैं। उन्होंने ये भी बताया कि 70 हजार लोगों को यहां ट्रीटमेंट दिया गया है। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्लिनिक पर छापा मारा।

हालांकि, छापे की कार्रवाई के बाद डॉक्टर लुसिया के हवाले से रिपोट्स में कहा जा रहा है कि वो वैक्सीन नहीं लगा रही थीं और मरीजों को विटामिन और सीरम की खुराक दे रही थीं, ताकि उनकी इम्यूनिटी बेहतर हो सके। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि वो कोरोना से बीमार मरीजों का इलाज लेजर ट्रीटमेंट और इन्फ्रारेड लाइट्स से करती थीं। 

हालांकि, छापे की कार्रवाई के बाद डॉक्टर लुसिया के हवाले से रिपोट्स में कहा जा रहा है कि वो वैक्सीन नहीं लगा रही थीं और मरीजों को विटामिन और सीरम की खुराक दे रही थीं, ताकि उनकी इम्यूनिटी बेहतर हो सके। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि वो कोरोना से बीमार मरीजों का इलाज लेजर ट्रीटमेंट और इन्फ्रारेड लाइट्स से करती थीं। 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फर्जी वैक्सीन लगाने वाले क्लिनिक के मरीजों में पुलिसकर्मी, सैनिक और राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो के स्टाफ भी शामिल थे। वहीं, स्थानीय लोगों ने क्लिनिक चलाने वालीं डॉक्टरों का बचाव किया है और कहा कि वो लोगों की जिदंगी बचाने का काम कर रही थीं। बता दें कि पुलिस की ओर छापा मारे जाने के बाद क्लिनिक बंद है और आगे की जांच की जा रही है।
 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फर्जी वैक्सीन लगाने वाले क्लिनिक के मरीजों में पुलिसकर्मी, सैनिक और राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो के स्टाफ भी शामिल थे। वहीं, स्थानीय लोगों ने क्लिनिक चलाने वालीं डॉक्टरों का बचाव किया है और कहा कि वो लोगों की जिदंगी बचाने का काम कर रही थीं। बता दें कि पुलिस की ओर छापा मारे जाने के बाद क्लिनिक बंद है और आगे की जांच की जा रही है।
 

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