पश्चिमी एशिया में जंग के कारण श्रीलंका में ईंधन संकट गहरा गया है। सरकार ने हफ्ते में 4 दिन काम और ईंधन राशनिंग लागू की है। निजी वाहनों को प्रति सप्ताह 15 लीटर ईंधन मिलेगा और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है।

कोलंबो: पश्चिमी एशिया में जारी जंग की वजह से श्रीलंका एक बार फिर गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है। इस मुश्किल हालात से निपटने के लिए श्रीलंकाई सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। चैनल न्यूज़ एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब देश में हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही काम होगा। यह फैसला होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका के चलते लिया गया है।

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यह लड़ाई अब अपने तीसरे हफ्ते में पहुंच चुकी है, जिससे उन देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं जो आयात किए जाने वाले ईंधन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने भी ऐसे ही कड़े प्रतिबंध लगाए थे। श्रीलंका 2022 की आर्थिक मंदी से धीरे-धीरे उबर ही रहा था कि इस नए संकट ने दस्तक दे दी। सरकार हालात और बिगड़ने से पहले ही ईंधन की खपत कम करना चाहती है।

हर बुधवार को छुट्टी का ऐलान

आवश्यक सेवाओं के कमिश्नर जनरल प्रभात चंद्रकीर्ति ने बताया कि ये नए नियम स्कूल और यूनिवर्सिटी पर भी लागू होंगे और अगले आदेश तक जारी रहेंगे। उन्होंने प्राइवेट सेक्टर से भी इसी मॉडल को अपनाने की अपील की है और हर बुधवार को छुट्टी घोषित करने को कहा है।

यह ऐलान राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके की अध्यक्षता में हुई एक इमरजेंसी मीटिंग के बाद किया गया। राष्ट्रपति ने कहा, "हमें सबसे बुरे हालात के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन उम्मीद अच्छे की करनी चाहिए।" हालांकि, अस्पताल, बंदरगाह और इमरजेंसी ऑपरेशन जैसी जरूरी सेवाएं पहले की तरह काम करती रहेंगी।

हफ्ते में सिर्फ 15 लीटर पेट्रोल

15 मार्च से, प्राइवेट गाड़ी चलाने वालों को हफ्ते में सिर्फ 15 लीटर पेट्रोल या डीजल मिलेगा। वहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों को 200 लीटर तक ईंधन दिया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि देश में पेट्रोल और डीजल का जो स्टॉक है, वह करीब छह हफ्तों तक ही चल पाएगा।

आपको बता दें कि श्रीलंका अपनी तेल की पूरी जरूरत के लिए आयात पर ही निर्भर है। यहां तक कि बिजली बनाने के लिए कोयला भी बाहर से ही मंगाया जाता है। देश सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदता है, जबकि कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आता है। यात्रा और ईंधन की खपत को कम करने के लिए, पब्लिक इवेंट्स पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। साथ ही, जहां भी मुमकिन है, सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने (Work From Home) के लिए कहा गया है।