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कोरोना से दुनिया को बचाने के लिए इस देश ने तोड़ा प्रोटोकाल; कल से टेस्टिंग, 2 महीने में मिलेगी दवा

लंदन. कोरोना के खिलाफ दुनिया भर में जंग जारी है। दुनिया भर में संक्रमित मरीजों की संख्या 25 लाख के पार पहुंच चुकी है। जबकि 1 लाख 77 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इन सब के बीच दुनिया के कई देश कोरोना का वैक्सीन ढूंढने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में ब्रिटेन में गुरुवार से इंसानों के ऊपर कोरोना वायरस के खिलाफ तैयार की गई वैक्सीन का ट्रायल शुरु किया जाएगा।

5 Min read
Author : Asianet News Hindi
Published : Apr 22 2020, 01:42 PM IST
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कोरोना के खिलाफ इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने तैयार किया है और इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने मंगलवार को 20 मिलियन पाउंड्स (189 करोड़ रुपये के करीब) खर्च करने की घोषणा की है। 

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ब्रिटेन के हेल्थ सेक्रेटरी मैट हैनकॉक ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस वैक्सीन तैयार करने के लिए हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार है। क्योंकि यह कोरोना वायरस महामारी से लड़ने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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हैनकॉक ने आगे कहा कि अगले फेज की तैयारी के लिए ब्रिटिश सरकार इंपीरियल कॉलेज लंदन को वैक्सीन पर रिसर्च करने के लिए 22.5 (210 करोड़ से ज्यादा) मिलियन पाउंड देगी। 

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उन्होंने कहा, 'वैसे तो इस वैक्सीन को तैयार करने में वर्षों लग जाते, लेकिन ब्रिटेन इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे खड़ा है। हमने किसी भी देश की तुलना में इसकी वैक्सीन ढूंढ़ने के लिए सबसे अधिक पैसे खर्च किए हैं। इससे ज्यादा जरूरी और कुछ नहीं हो सकता है।

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वैक्सीन का उत्पादन ट्रायल और गलतियों के लिए ही होता है। लेकिन ब्रिटेन इसका पुख्ता इलाज पाने के लिए कुछ भी न्योछावर करने को तैयार है। 

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वुहान से लेकर इंग्लैंड, अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रलिया तक के लैब वैक्सीन बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इससे पहले ईबोला की वैक्सीन पांच साल के रिसर्च के बाद बनी थी। इस बार पूरी दुनिया आपात स्थिति से निपट रही है, इसलिए तैयारी उसी तरह से हो रही है।

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इंग्लैंड में एक साथ 21 लैब में काम शुरू
पिछले दिनों जानकारी सामने आई थी कि इंग्लैंड में कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिक दिन रात एक किए हुए हैं। यहां 21 नए रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए इंग्लैंड की सरकार ने 1.4 करोड़ पाउंड की राशि मुहैया कराई है।
 

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में 10 लाख वैक्सीन की डोज बनाने की तैयारी चल रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दुनिया में सितंबर तक कोरोना का वैक्सीन आ सकता है।

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जेनर इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आड्रियान हिल कहते हैं, हम किसी भी कीमत पर सितंबर तक दस लाख डोज तैयार करना चाहते हैं।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि एक बार वैक्सीन की क्षमता का पता चल जाए तो उसे बढाने पर बाद में भी काम हो सकता है। ये स्पष्ट है कि पूरी दुनिया को करोड़ों डोज की जरूरत पड़ने वाली है। तभी इस महामारी का अंत होगा और लॉकडाउन से मुक्ति मिलेगी।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर उपाय हो सकता है। सोशल डिस्टेंशिंग से सिर्फ बचा जा सकता है। गौरतलब है कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन खुद संक्रमण के शिकार हो गए थे। हालांकि अब वो पूरी तरह स्वस्थ हैं।

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जेनर इंस्टीट्यूट के मुताबिक दो महीने में पता चल जाएगा कि वैक्सीन मर्ज कितना कम कर पाएगी। इंग्लैंड सरकार के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर सर पैट्रिक वैलेस ने कहा, 21 प्रोजेक्ट हैं। ये सत्य है कि सभी प्रोजेक्ट से शुभ समाचार मिलने वाला नहीं है। इसलिए हम सभी को प्रोत्साहन दे रहे हैं। क्या पता कहां से सबसे प्रभावशाली वैक्सीन बन कर निकल जाए।

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WHO के प्रोटोकॉल को तोड़ कर हो रहा काम
वैक्सीन तैयार करने का प्रोटोकॉल 12 से 18 महीने का होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन भी यही कहती है। ब्रिटेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर क्रिस विह्टी कहते हैं, हमारे देश में दुनिया के जाने माने वैक्सीन वैज्ञानिक हैं, लेकिन हमें पूरे डेवलपमेंट प्रोसेस को ध्यान में रखना है।
 

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वैज्ञानिकों का कहना है कि डेवलपमेंट प्रोसेस को कम किया जा सकता है। टास्क फोर्स इस पर काम कर भी रही है। हम सिर्फ यही चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी Covid-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार हो जाए।

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दो साल का ट्रायल दो महीने में होगा पूरा
मानव इस्तेमाल से पहले वैक्सीन का प्री-क्लीनिकल ट्रायल जानवरों पर होता है। इससे पता चलता है कि ये मनुष्यों के लिए कितना सेफ है। इसमें दो साल तक लग जाता है।
 

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पूरी दुनिया में आपातकाल जैसी स्थिति को देखते हुए इस प्रक्रिया को दो महीने में पूरा करने की तैयारी है। क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे फेज में कृत्रिम इन्फेक्शन पर वैक्सीन को आजमाया जाता है। इससे क्षमता का अंदाजा लगता है।

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वैक्सीन की सेफ्टी, साइड इफेक्ट और असर का आकलन इसी फेज में होता है। फेज 3 में बड़े पैमाने पर इसका वास्तविक इस्तेमाल होता है। फेज-4 में वैक्सीन का लाइसेंस हासिल किया जाता है ताकि मार्केट में बिक्री के लिए उतारा जा सके।

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भारत में भी तेजी से हो रहा है काम

कोरोना की वैक्सीन को लेकर भारत में भी तेजी से काम हो रहा है। हैदराबाद की वैक्सीन कंपनी भारत बायोटेक अगले चार महीने में विकसित की गई वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर देगी। अभी इसका एनिमल ट्रायल चल रहा है। 2020 खत्म होने से पहले यह टीका इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो सकता है।

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दुनिया में कोरोना का कहर 
दुनिया में कोरोना का संक्रमण अपने चरम पर है। दुनिया के 210 देशों में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 25 लाख 57 हजार से अधिक है। जबकि अब तक 1 लाख 77 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना के संक्रमण से सबसे ज्यादा अमेरिका प्रभावित है। 

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अमेरिका में संक्रमति मरीजों की संख्या 8 लाख से अधिक है। जबकि अब तक 45 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, ब्रिटेन में 1 लाख 29 हजार पॉजिटिव मरीज हैं। जबकि 17 हजार 337 लोगों की मौत हो चुकी है। 

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