Jagannath Temple kitchen facts: पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर का रसोईघर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर किचन में गिना जाता है। यहां मिट्टी के बर्तनों, लकड़ी के चूल्हों और सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार महाप्रसाद तैयार होता है। जानिए इससे जुड़े 10 रोचक और अनोखे तथ्य।
Jagannath Temple Kitchen Facts: ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर का रसोईघर, जिसे रोजाघर भी कहते हैं, दुनिया के सबसे बड़े मंदिर रसोईघरों में गिना जाता है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार होता है। इस रसोईघर की खासियत सिर्फ इसका साइज नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराएं, अनोखी कार्यप्रणाली और डिसिप्लीन (अनुशासन) भी हैं। आइए जानते हैं इस रसोईघर से जुड़े 10 रोचक फैक्ट।
1. यहां हर दिन हजारों लोगों का भोजन बनता है
जगन्नाथ मंदिर के रसोईघर में नॉर्मल दिनों में भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार होता है। रथयात्रा और बड़े त्योहारों पर यह संख्या कई गुना हो जाती है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, भोजन की मात्रा श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार तय होती है।
2. खाना आज भी मिट्टी के बर्तनों में बनता है
स्टील या एल्यूमिनियम के बड़े बर्तनों की जगह यहां पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों का यूज होता है। हर बार नए मिट्टी के बर्तन यूज होते हैं। इससे पारंपरिक टेस्ट और शुद्धता बनाए रखने की परंपरा जुड़ी है।
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3. बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखकर खाना पकाया जाता है
रसोईघर की सबसे अनोखी बात यह है कई मिट्टी के बर्तनों को एक-दूसरे के ऊपर रखा जाता है और नीचे केवल एक ही आग जलती है। ऊपर रखे बर्तनों तक भी भाप और गर्मी पहुंचती है, जिससे सभी बर्तनों में भोजन पकता है। यह एक ऐसा पुराना कुकिंग सिस्टम है, जिसमें उबलते पानी से निकलने वाली गर्म भाप (Hot Steam) की मदद से खाना पकता है।
4. सैकड़ों रसोइये मिलकर बनाते हैं महाप्रसाद
भोजन बनाने का काम सुआरा और महासुआरा नामक पारंपरिक सेवायत समुदाय करता है। यह सेवा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। हर इंसान की जिम्मेदारी पहले से फिक्स होती है।
5. महाप्रसाद बनाने के नियम सदियों से लगभग एक जैसे हैं
भोजन बनाने का टाइम, सामग्री, विधि और पूजा से जुड़ा प्रोसेस तय परंपराओं के मुताबिक होती है।
6. यहां दर्जनों प्रकार के व्यंजन बनते हैं
भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले भोग में चावल, दाल, सब्जियां, खिचड़ी, मीठे पकवान और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। कुछ और भी खास मौकों पर भोग के प्रकार और संख्या में चेंज होता रहता है।
7. महाप्रसाद सभी के लिए समान है
जगन्नाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि महाप्रसाद को सामाजिक समानता का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, महाप्रसाद लेने में कास्ट, वर्ग या किसी शख्स की इकोनॉमी कंडीशन नहीं देखी जाती है।
8. लकड़ी के चूल्हों पर ही बनता है भोजन
आज भी मंदिर के रसोईघर में लकड़ी के चूल्हों का प्रयोग होता है। यह सिस्टम सदियों पुरानी परंपरा का पार्ट है, आज भी उसी सिस्टम से भोजन तैयार होता है।
9. खास प्रोसेस से बनता है 'महाप्रसाद'
रसोई में तैयार भोजन पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को चढ़ाया जाता है। इसके बाद इसे देवी बिमला को चढ़ाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद ही यह भोजन महाप्रसाद कहलाता है।
10. यह सिर्फ रसोई नहीं, सेवा और अनुशासन का सेंटर है
रसोईघर में काम करने वाले सेवायत तय नियमों के अनुसार सेवा करते हैं। भोजन बनाने से लेकर प्रसाद बांटने तक हर काम एक फिक्स सिस्टम और जिम्मेदारी के साथ होता है।
Content References: Shree Jagannath Temple Administration (SJTA), Puri, Odisha Tourism, Ministry of Culture, Government of India, Skanda Purana (Purushottama Mahatmya), Ananda Bazaar.


