Raksha Bandhan tilak significance: हिंदू धर्म में तिलक लगाने की परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। इसका विशेष महत्व है। रक्षा बंधन के मौके पर भी बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने से पहले तिलक लगाती हैं।

Rakhi tilak religious meaning: रक्षा बंधन के दिन बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उससे पहले उसके माथे पर तिलक लगाती है। इसके बाद अक्षत यानी चावल लगाकर आरती की जाती है और फिर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। रक्षा बंधन की पूजा-विधि में तिलक और अक्षत का इस्तेमाल होता है। सवाल है- राखी बांधने से पहले ही भाई के माथे पर तिलक क्यों लगाया जाता है? क्या इसका संबंध किसी कथा से है? क्या धर्म-ग्रंथों में तिलक लगाने का कोई खास अर्थ बताया गया है?

तिलक का धार्मिक अर्थ क्या है?

हिंदू धर्म में माथे को बॉडी का मुख्य पार्ट माना गया है। पूजा-पाठ में माथे पर चंदन, कुमकुम, रोली, भस्म या अन्य चिह्न लगाने की परंपरा है। रक्षा बंधन में लगाया जाने वाला तिलक शुभता और मंगलकामना का प्रतीक है। बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित जीवन की दुआ करती है। इसके बाद बांधी जाने वाली राखी उसी रक्षा के संकल्प को प्रतीकात्मक रूप देती है।

तिलक के बाद अक्षत क्यों लगाते हैं?

तिलक के साथ चावल के अक्षत लगाया जाता है। ‘अक्षत’ का सामान्य अर्थ है- जो टूटा हुआ न हो। पूजा में साबुत चावल को इसी वजह से शुभ माना जाता है। रक्षा बंधन की पूजा में तिलक और अक्षत का मेल भाई के लिए पूर्णता, समृद्धि और मंगल की कामना से जोड़ा जाता है। पहले तिलक लगाया जाता है और फिर रक्षा सूत्र बांधा जाता है।

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क्या तिलक और रक्षा सूत्र का कोई संबंध है?

दोनों रस्मों का भाव एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। तिलक के जरिए भाई के कल्याण की कामना की जाती है, जबकि राखी को रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से राखी की रस्म में क्रम भी महत्वपूर्ण माना जाता है- पहले पूजा और तिलक, फिर रक्षा सूत्र। यानी भाई को शुभकामना देने के बाद उसकी कलाई पर रक्षा का धागा बांधा जाता है।

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इंद्र और इंद्राणी की कथा में मिलता है रक्षा सूत्र का प्रसंग

रक्षा बंधन से जुड़ी प्राचीन कथाओं में इंद्र और इंद्राणी का प्रसंग काफी प्रचिलत है। कथा के अनुसार- देवताओं और दानवों के युद्ध में इंद्र संकट में थे। तब इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके कल्याण तथा विजय की कामना की। इसके बाद इंद्र युद्ध जीत गए। इस कथा का मुख्य केंद्र रक्षा सूत्र है।

यम और यमुना की कहानी में भाई-बहन का भाव

रक्षा बंधन से जुड़ी एक अन्य कथा यमराज और यमुना की है। यमुना ने अपने भाई यमराज का स्वागत किया और उनकी पूजा-सत्कार किया। प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया। इस कथा को भाई-बहन के प्रेम और बहन की मंगलकामना से जुड़ी परंपराओं के साथ देखा जाता है। यह कथा बताती है कि भाई की मंगलकामना और उसकी सुरक्षा का भाव हिंदू त्योहारों की पुरानी परंपराओं में महत्वपूर्ण रहा है।

श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को दिया था रक्षा का वचन

रक्षा बंधन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथाओं में भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी है। जब कृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी। द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। इस प्रेम से प्रभावित होकर कृष्ण ने उनकी रक्षा का वादा किया था। बाद में चीरहरण के दौरान कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की थी।

तिलक लगाने का सबसे बड़ा संदेश

राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर लगाया गया तिलक सिर्फ एक रंग या निशान नहीं है। यह बहन की शुभकामना का प्रतीक है। वह भाई के लिए अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके बाद राखी बांधना उस भावना को रक्षा के संकल्प से जोड़ता है। इसलिए तिलक और राखी मिलकर एक ऐसी रस्म बनाते हैं, जिसमें सम्मान, मंगलकामना, प्रेम और सुरक्षा चारों भाव दिखाई देते हैं।