Pilot Food Rules: फ्लाईदुबई फ्लाइट के हाईजैक की कोशिश के बाद से पायलटों के नियमों की काफी चर्चा हो रही है। फ्लाइट में दोनों पायलटों को कभी एक जैसा खाना नहीं दिया जाता। इसका मकसद फूड पॉइजनिंग से बचना है, ताकि इमरजेंसी में कम से कम एक पायलट विमान उड़ाने के लिए पूरी तरह फिट रहे।
Pilot and Co Pilot Food: दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) फ्लाइट को हाईजैक करने की कोशिश ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस घटना में भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मिथ मच्चर (Captain Smith Macchar) की बहादुरी से सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि हमलावर कोई और नहीं, बल्कि ओमान का रहने वाला को-पायलट ही था। इस घटना के बाद से हर तरफ पायलटों की दिनचर्या, उनके खाने और फ्लाइट के नियमों की चर्चा हो रही है। क्या आपको पता है कि एक ही फ्लाइट में मौजूद दोनों पायलटों को कभी एक जैसा खाना क्यों नहीं दिया जाता? इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प वजह है।
फ्लाइट के दोनों पायलटों को एक जैसा खाना क्यों नहीं देते?
फ्लाइट के कैप्टन अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं खा सकते। ड्यूटी पर मौजूद पायलटों के लिए खाना उनकी पसंद से ज्यादा सुरक्षा का मामला होता है। दोनों पायलट कभी भी एक साथ बैठकर खाना नहीं खाते। इसके अलावा, कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर को कभी भी एक जैसी डिश नहीं परोसी जाती। यानी अगर एक पायलट को दाल-चावल या रोटी दी गई है, तो दूसरे को वह खाना बिल्कुल नहीं मिलेगा। बहुत कम लोग इस नियम के बारे में जानते हैं। आइए समझते हैं कि एयरलाइंस ऐसा क्यों करती हैं।
पायलटों के खाने का यह नियम क्यों बना?
अगर दोनों पायलट एक ही तरह का खाना खाएंगे और खाने में कोई गड़बड़ी हुई, तो दोनों एक साथ बीमार पड़ सकते हैं। इसी खतरे को टालने के लिए कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर को हमेशा अलग-अलग तरह का खाना दिया जाता है। इससे अगर किसी एक को फूड पॉइजनिंग हो भी जाए, तो दूसरा पायलट सुरक्षित रहता है क्योंकि उसने कुछ और खाया होता है। इस तरह कॉकपिट में हमेशा एक पायलट ड्यूटी के लिए फिट रहता है। अलग-अलग खाना देने से दोनों के एक साथ बीमार पड़ने की नौबत नहीं आती।
खाने के मेन्यू में एक पायलट को चिकन मिल सकता है, तो दूसरे को पास्ता, मछली या कोई शाकाहारी डिश दी जा सकती है। यह मेन्यू एयरलाइन की अपनी सुरक्षा नीतियों पर निर्भर करता है। जब एक पायलट खाना खा रहा होता है, तब दूसरा पायलट विमान को कंट्रोल करने, एटीसी से बात करने और कॉकपिट की बाकी जिम्मेदारियां संभालता है।
पायलटों को अलग-अलग खाना देना असल में एयरलाइन की सुरक्षा का एक अहम नियम है। हालांकि, यह दुनिया भर के एविएशन अथॉरिटी का कोई अनिवार्य कानून नहीं है, लेकिन एयरलाइंस इसे एहतियात के तौर पर मानती हैं। इसका सीधा सा मकसद यही है कि कम से कम एक पायलट हमेशा अलर्ट रहे और विमान को सुरक्षित उड़ा सके।
अगर आप जमीन पर कोई गाड़ी चला रहे हैं, तो भूख लगने पर उसे किनारे खड़ी करके खाना खा सकते हैं। इसके लिए एक ड्राइवर ही काफी है। लेकिन हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान में अगर एक ही पायलट हो, तो यह कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। फ्लाईदुबई की उस फ्लाइट में कॉकपिट के अंदर दो पायलटों के अलावा एक और क्रू मेंबर मौजूद था। जब कैप्टन स्मिथ मच्चर पर हमला हुआ, तो यात्रियों ने हमलावर को पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। इस हाथापाई में विमान काफी नीचे आ गया था, लेकिन कॉकपिट में मौजूद उस तीसरे क्रू मेंबर ने तुरंत कंट्रोल अपने हाथ में लिया और विमान को वापस सही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। जरा सोचिए, अगर वहां एक या दो ही पायलट होते और दोनों उलझ जाते, तो क्या होता?
