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chandra grahan 2022:चंद्रग्रहण में बढ़ जाती हैं मानसिक परेशानी, डिप्रेशन वालों पर होता है खास असर

Chandra Grahan 2022: चांद को हमेशा मूड और इमोशन को जोड़कर देखा गया है। इसके घटने और बढ़ने का असर मूड पर पड़ता है यह बात साइंस ने भी मानी है। चंद्र ग्रहण मानसिक रूप से लोगों को परेशान कर सकता है।

chandra grahan 2022 according to science lunar eclipse affect your mood NTP
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First Published Nov 8, 2022, 1:41 PM IST

हेल्थ डेस्क. 8 नवंबर यानी मंगलवार को इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण (chandra grahan 2022) लगने वाला है। चांद धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।  चांद हमारे हेल्थ पर भी असर डालता है। ये बात वैज्ञानिक रूप से साबित हो गया है। चंद्रमा समुद्र में ज्वार भाटा को पैदा करता है। वो कई अलग-अलग जानवरों के जीवन चक्र और उनके व्यवहार को भी प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल समुद्र और पृथ्वी की सतह की सतह को प्रभावित कर सकता है तो मनुष्य के शरीर पर इसका प्रभाव जरूर पड़ता है।

चंद्र ग्रहण मेंटली और इमोशनली डालता है असर

चंद्र ग्रहण का दुनियाभर में कई लोगों पर मेंटली और इमोशनली असर होता है। साल 1993 से 1997 के बीच  एक स्टडी की गई। जिसमें चंद्रमा के मूवमेंट और लोगों पर उसके असर पर ध्यान दिया गया। स्टडी में पाया गया कि पूर्णिमा और अमावस्या के दौरान कुछ लोगों मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर महसूर कर रहे थे। इस दौरान यह भी देखा गया कि मनोविकृति वाले रोगियों के लक्षण चंद्र ग्रहण के दिन ज्यादा बढ़ गया था। मतलब जिन लोगों डिप्रेशन और एंग्जायटी की शिकायत है उनके लिए चंद्र ग्रहण का दिन और भी परेशानी वाला हो सकता है। 

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सूर्य बॉडी को एक्टिव बनाता है वहीं, चंद्रमा मन के विचार से जुड़ा है

सूर्य जहां बॉडी के सारे चक्र को एक्टिवेट करने के लिए जाना जाता है। वहीं, चंद्रमा ब्रेन को शांत और मन के विचारों से कनेक्ट है। जब चंद्र ग्रहण होता है तो ये एलिमेंट असंतुलित होता है। जिसका असर मानसिक रूप से कमजोर लोगों पर हो सकता है।

पूर्णिमा के दिन नींद में आती है कमी

वहीं, बस्टलडॉटकॉम के मुताबिक पूर्णिमा के दिन  एनर्जी और मोटिवेशन में बढ़ोतरी होती है। आप नयापन महसूस करने लगते हैं। लेकिन अमावस्या  के दौरान एनर्जी लेबल में आप गिरावट दर्ज कर सकते हैं। करंट बायोलॉजी में प्रकाशित, 2013 के एक स्टडी में भाग लेने वाले लोगों ने पूर्णिमा के दिन कम नींद का अनुभव किया। नींद की कमी होने की वजह से मनोदशा और सेहत पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यह हेल्थ को भी प्रभावित करता है।

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