एक तरफ जहां कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए इस साल सितंबर तक वैक्सीन सामने आ जाएगा, वहीं एक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि वैक्सीन से इस वायरस से सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। समय के साथ लोग खुद ही वायरस से इम्युनिटी विकसित कर लेंगे। 

हेल्थ डेस्क। एक तरफ जहां कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए इस साल सितंबर तक वैक्सीन सामने आ जाएगा, वहीं एक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि वैक्सीन से इस वायरस से सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। समय के साथ लोग खुद ही वायरस से इम्युनिटी विकसित कर लेंगे। लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में ग्लोबल हेल्थ के प्रोफेसर डेविड नाबैरो ने कहा है कि लोगों को इस वायरस के खतरे के साथ जीना होगा और समय के साथ वे इससे इम्युनिटी विकसित कर लेंगे यानी उनकी बॉडी का सिस्टम इस तरह अडैप्ट हो जाएगा कि वायरस का कोई असर उन पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसी वैक्सीन से इस वायरस के खतरे से बचा नहीं जा सकता। प्रोफेसर डेविड नाबैरो कोविड-19 को लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के दूत हैं। 

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ब्रिटेन में बढ़ रहा है मौतों का आंकड़ा
ब्रिटेन में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। वहां अब तक 16,060 लोगों की इससे मौत हो चुकी है, वहीं 120,067 लोग इससे संक्रमित हैं। शनिवार को जब प्रोफेसर डेविड नाबैरो ने कहा था कि कोविड-19 पर वैक्सीन से काबू पाना मुश्किल होगा, तब यूके के हॉस्पिटल्स में 15,000 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी थी। 'द ऑब्जर्बर' के साथ एक इंटरव्यू में प्रोफेसर डेविड नाबैरो ने कहा कि लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि कोविड-19 से बचाव के लिए जल्दी कोई वैक्सीन विकसित नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि लोगों को इस खतरे से बचाव के लिए खुद को अडैप्ट करना होगा। 

हर वायरस से बचाव का वैक्सीन नहीं बन सकता
प्रोफेसर डेविड नाबैरो ने कहा कि हर वायरस से बचाव के लिए सुरक्षित और असरदार वैक्सीन विकसित नहीं किया जा सकता। कुछ वायरस इतने जटिल होते हैं कि बहुत आसानी से उनका टीका विकसित नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में हमें इस वायरस के साथ जीने का तरीका ढूंढना होगा। इस वायरस का खतरा लगातार बना रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे लोग इससे इम्युनिटी डेवलप कर ले सकते हैं।

नेशनल हेल्थ सर्विस के पास है संसाधनों की कमी
नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन के अस्पतालों में सुरक्षा उपकरणों और पीपीई की कमी हो गई है, जिससे फ्रंट लाइन पर काम करने वाले स्टाफ, एनएचएस वर्कर्स यूनियनों ने सरकार पर दबाव डालना शुरू किया है और सुरक्षा के लिए उपकरणों की मांग की है। मार्च के अंत में सरकार के स्वास्थ्य सलाहकारों ने कहा था कि यदि ब्रिटेन में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को महामारी के अंत तक 20,000 से नीचे रखा जा सकता है, तो यह देश के लिए अच्छा होगा। लेकिन मौतों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

क्या कहना है ब्रिटेन के पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी का
ब्रिटेन के पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी जेरेमी हंट ने कहा है कि देशों के लिए एक नई वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का समर्थन करने का एकमात्र तरीका यह था कि स्वास्थ्य के मुद्दों पर सरकारों के बीच कहीं ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाए। दुनिया के सबसे गरीब देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अमीर देशों को ज्यादा कोशिश करने की जरूरत है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की फंडिंग पर रोक लगाने की बात कहने के लिए आलोचना भी की है। उन्होंने कहा कि चीन ने शुरुआती दौर में वायरस पर नियंत्रण करने के लिए सही तरीके से काम किया, लेकिन अगर इसका संक्रमण अफ्रीका में शुरू हो जाता तो स्थिति पूरी तरह से बदतर हो जाती।