कोरोना की दूसरी लहर का असर कम नहीं हुआ है। राज्यों में अनलॉक की स्थिति बन रही है।  कोरोना वायरस के अधिकतर मरीजों की मौत सांस की कमी से हुई  है। 

हेल्थ डेस्क। कोरोना की दूसरी लहर का असर कम नहीं हुआ है। राज्यों में अनलॉक की स्थिति बन रही है। कोरोना वायरस के अधिकतर मरीजों की मौत सांस की कमी से हुई है। पिछले महीने कोरोना के मरीजों में ऑक्सीजन लेवल कम होने के अधिक मामले देखे गए। यही वजह थी कि मरीजों को अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की भारी कमी का सामना करना पड़ा। मध्य प्रदेश की राज्यधानी भोपाल की डॉकटर अंजु गुप्ता के मुताबिक ऑक्सीजन लेवल की निगरानी करना और समय पर इलाज कराने से मरीज की जान को बचाया जा सकता है।कोरोने के मामले में हमेशा ऑक्सीजन लेवल कम होना जैसी परेशानी नहीं होती है। इसमें हल्का बुखार, खांसी और गंध और स्वाद की कमी जैसे लक्षण भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, जिन लोगों को सांस लेने में कठिनाई होती है या किसी भी समय सांस फूलने का अनुभव होता है, उन्हें अस्पताल ले जाना चाहिए और चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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नाक का फड़कना
शरीर में कम ऑक्सीजन का स्तर आपको सांस लेने के लिए हांफता हुआ छोड़ सकता है। इस दौरान एक संकेत के रूप में नाक का फड़कना नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जब सांस लेते समय नासिका मार्ग के ज्यादा फैलते हैं, तो यह संकेत दे सकता है कि एक व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम है और उसे ठीक से सांस लेने में कठिनाई हो रही है।

सांस लेने में कठिनाई
हाइपोक्सिया या कम ऑक्सीजन का स्तर सांस की तकलीफ, सांस लेने में कठिनाई और सांस फूलने जैसे लक्षणों से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में रोगी के शरीर के लिए सामान्य रूप से कार्य करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। कोरोना होने पर ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहे। 

सीने में दर्द 
शरीर में कम ऑक्सीजन का स्तर सीने में दर्द और जमाव के लक्षण भी पैदा कर सकता है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे लक्षण महसूस होने पर आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।