भाजपा की आदिवासी नेता और झारखंड की राज्यपाल रहीं द्रौपदी मुर्मू  को एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। मुर्मू को बधाई देने वाले ट्वीट में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि वह हमारे देश की एक महान राष्ट्रपति होंगी। मुर्मू का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उनकी जिंदगी में कई हादसे हुए, पति और दो बेटों तक को खो दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

रांची (झारखंड). भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की तरफ से झारखंड की पूर्व राज्यपाल रहीं द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। बुधवार की सुबह से ही द्रौपदी मुर्मू के ओड़िशा के रायरंगपुर स्थित आवास के बाहर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। आज हर भरतीय उनके बार में सर्च कर रहा है। लेकिन कम लोगों को पता है कि उनकी जिंदगी बहुत ही दर्दभरी रही है। बचपन से लेकर अब तक उनका काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 

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 पति और अपने दोनों बेटों को खोने के बाद टूट चुकी थीं....

दरअसल, द्रौपदी मुर्मू मूल रुप से ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव की रहने वाली हैं। वह आदिवासी संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका जन्म 20 जून 1958 को जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था। द्रौपदी मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ था। जिसके बाद उन्हें दो बेटे और एक बेटी हुई, सब ठीक चल रहा था, लेकिन हादसों में उनके पति और दोनों बेटों को खो दिया। इन हादसों के बाद वह पूरी तरह से टूट चुकी थीं, लेकिन उन्होंने बेटी की खातिर हिम्मत नहीं हारी और दर्दभरे जीवन से खुद को निकाल लिया।

5 साल के अंदर द्रौपदी मुर्मू का पूरा परिवार हो चुका था खत्म

बता दें कि शादी के कुछ दिन बाद ही उनके बड़े बेटे की साल 2009 में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह किसी तरह इस सदमे से बाहर आ ही रही थीं कि तीन साल बाद 2012 में फिर एक दर्दनाक सड़क एक्सीडेंट में दूसरे बेटे की भी जान चली गई। इसके बाद टेंशन और तनाव के चलते पति श्याम चरण मुर्मू का कार्डियक अरेस्ट के कारण पहले ही निधन हो चुका था। अब सिर्फ द्रौपदी मुर्मू की एक बेटी ही बची थी जिसके लिए उन्हें जीना था।

दो बार नौकरी छोड़ने के बाद बदली किस्मत

द्रौपदी मुर्मू अपनी बेटी के लिए एक बार फिर खड़ी हुईं और घर चलाने व बेटी की पढ़ाई के लिए एक टीचर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद यह नौकरी छोड़कर उन्होंने ओडिशा के सिंचाई विभाग में एक क्लर्क की जॉब शुरूआत की। लेकिन यहां भी उनका ज्यादा समय तक मन नहीं लगा, उनकी जिंदगी में तीन बार दुुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दो नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया और यहीं से उनकी किस्मत ने बदलना शुरू कर दिया। 

पार्षद से बनी मंत्री और राज्यपाल और बनेंगी राष्ट्रपति

साल 1997 में पहली बार निगम पार्षद के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गईं। इसके बाद प्रदेश की राजनीती में उनकी दिलचस्पी हुई और ओडिशा के रैरंगपुर विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव लड़ा और दो बार बीजेपी विधायक बनीं। फिर 2000 से 2004 के बीच नवीन पटनायक सरकार में उनको मंत्री बनाया गया। राज्य से निकलकर वर केंद्र की राजनीति में आईं औरनरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें 2015 में झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। एक साल पहले उनका कार्यकाल समाप्त हुआ है और अब बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना दिया।