यह शर्मनाक तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम की है। गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या हालत है, यह मामला यही दिखाता है। इस गर्भवती महिला को इस तरह हॉस्पिटल तक पहुंचाना पड़ा।

पश्चिम सिंहभूम, झारखंड. यह शर्मनाक तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम की है। गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या हालत है, यह मामला यही दिखाता है। इस गर्भवती महिला को इस तरह हॉस्पिटल तक पहुंचाना पड़ा। ऐसी स्थितियां किसी एक प्रदेश की नहीं, देश में हर दूर-दराज के गांवों में देखने को मिल जाएंगी। इस महिला को करीब 5 किमी तक इस तरह बैठकर दर्द झेलना पड़ा। इस बीच एक अन्य गर्भवती ने एम्बुलेंस न मिलने पर दम तोड़ दिया।

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खाट पर गर्भवती..

यह मामला बिशुनपुर प्रखंड के गढ़ा हाडुप गांव का है। यहां रहने वाले बलदेव ब्रिजिया के पत्नी ललिता को सोमवार शाम प्रसव पीड़ा हुई। उस हॉस्पिटल तक ले जाने का जब कोई दूसरा साधन नहीं दिखा, तो खटिया को लोगों ने 'एम्बुलेंस' बना लिया। दरअसल, जब दर्द से पत्नी को तड़पते देखा, तो बलदेव से रहा नहीं गया। उसके भी आंसू निकल आए। उसने बगैर कोई विलंब किए पत्नी के लिए खटोला बनाया और उसे हॉस्पिटल तक पहुंचाया। गर्भवती को बिशुनपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। यह मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन विजया भेंगरा ने कहा कि उन्होंने इस बारे में प्रभारी चिकित्सा से बात की है।

एक गर्भवती ने दम तोड़ा...
एक अन्य घटना में गुदड़ी ब्लॉक के किचिण्डा गांव में एम्बुलेंस न मिलने पर एक गर्भवती ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। यहां रहने वाले दानियल बरजो की पत्नी मोयलेन को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई थी। इसके लिए दानियल ने अस्पताल से एम्बुलेंस की मांग की गई। लेकिन सोमवार तक एम्बुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद गुदड़ी की जिपं सदस्य आइलिना बरजो ने 108 एम्बुलेंस को भी कॉल किया, लेकिन कॉल सेंटर ने वहां आने से मना कर दिया। इससे पहले कि परिजन अपने साधन से गर्भवती को हॉस्पिटल ले जाते, उसने दम तोड़ दिया। अब सिविल सर्जन मंजू दुबे मामले की जांच की बात कह रही हैं।