Spring Pruning Importance: बसंत में प्रूनिंग करने से पौधों की नई ग्रोथ तेज होती है और फूल-फल ज्यादा लगते हैं। जानें प्रूनिंग करने का सही तरीका, सही समय और कटे तने पर कौन सा पेस्ट लगाना चाहिए।

पतझड़ के बाद बसंद के मौसम में पौधों में नई पत्तियां आती है। यही मौसम पौधों को एक बा फिर से खिलाने का होता है। सर्दियों के बाद बसंद में मौसम परिवर्तन होता है और ज्यादा तापमान बढ़ता है। तब पौधों में नई कोपलें, पत्तियां और शाखाएं निकलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही समय प्रूनिंग के लिए बेस्ट माना जाता है। प्रूनिंग से मतलब पौधों के तने को काटने से है। प्रूनिंग न सिर्फ सूखी और कमजोर टहनियों को हटाती है, बल्कि पौधे को सही आकार भी देती है।बसंत में की गई प्रूनिंग पौधे के स्वास्थ्य को अच्छा रखती है और फूल फल तेजी से लगते हैं। जानिए कैसे की जाती है पौधों की प्रूनिंग।

प्रूनिंग क्यों होती है जरूरी?

प्रूनिंग के दौरान आपको सूखी, कमजोर, रोगग्रस्त टहनियां हटानी होती है। आप कैंची (प्रूनर) या फिर चाकू की मदद ले सकते हैं। आपको टहनियों को नोड एरिया के ऊपर से कटिंग करना है ताकि जल्दी ग्रोथ हो सके। प्रूनिंग से पौधा फैलता नहीं है और सही शेप में ग्रो करता है। घनी और उलझी टहनियों में कीड़े,फंगस जल्दी पनपते हैं। ऐसे में प्रूनिंग से हवा और धूप का फ्लो बेहतर होता है और पौधे तेजी से ग्रो करते हैं।

प्रूनिंग के दौरान कौन-सी ब्रांच निकालें?

  1. क्रॉस होती या आपस में रगड़ खाती टहनियां
  2. अंदर की ओर बढ़ रही ब्रांचेस
  3. सूखी और मरी हुई टहनियां

प्रूनिंग के बाद तने में लगाएं पेस्ट

जब आप प्रूनिंग कर लें तो कटे हुए तने के हिस्से में बोर्डो पेस्ट (Bordeaux Paste) जरूर लगाएं। आप आसानी से ये पेस्ट नर्सरी से खरीद सकती हैं। इसे लगाने से पौधा फंगल इंफेक्शन से बचाता है और साथ ही कटे हिस्से को जल्दी भरने में मदद मिलती है। आप चाहे तो 1 भाग कॉपर सल्फेट,1 भाग चूना को थोड़ा पानी मिलाकर भी बोर्डो पेस्ट बना सकते हैं।

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