कोरोना ने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल दी। वैक्सीन के बाद भी लोग इसके प्रभाव से पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि उनकी पुरानी बीमारी इसकी वजह से बढ़ गई है जिसमें माइग्रेन भी शामिल है।

हेल्थ डेस्क. कोरोना के प्रकोप ने ना जाने कितनी जिंदगियों को खत्म कर दिया। अभी भी इसके शिकार लोगों में साइड इफेक्ट देखने को मिल रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों ने यह दावा किया कि कोविड-19 (Covid-19) से पीड़ित होने के बाद या वैक्सीन लगने के बाद उनके माइग्रेन की स्थिति और बिगड़ गई है। सिरदर्द पहले से ज्यादा होने लगा है। सवाल है कि क्या वाकई कोरोना और उसके वैक्सीन की वजह से माइग्रेन (migraine) पर असर हुआ है।

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स्पैनिश हेडेक क्लिनिक में माइग्रेन के रोगियों ने इस बात की जानकारी दी कि कोरोना होने या फिर वैक्सीन लगने के बाद उनके माइग्रेन की कंडिशन और खराब हो रही है। क्लीनिक के 550 वयस्कों रोगियों में से 44.9 प्रतिशत (247) ने कम से कम एक बार सीओवीआईडी ​​-19 की सूचना दी और 83.3 प्रतिशत (458) को टीका लगाया गया था। 61 रोगियों (24.7 प्रतिशत) ने बताया कि कोविड-19 के बाद से माइग्रेन की स्थिति बिगड़ रही है और 52 (11.4 प्रतिशत) ने वैक्सीनेशन होने के बाद माइग्रेन की स्थिति खराब होने की सूचना दी है।जिन पेशेंट ने महसूस किया कि उनका माइग्रेन खराब हो गया है, जो लोग संक्रमित थे, उनमें माइग्रेन के बिगड़ने की चिंता 2.5 गुना अधिक थी और जिन रोगियों को वैक्सीन लगाया था, उनमें यह चिंता होने की संभावना 17.3 गुना अधिक थी।

कोरोना और माइग्रेन का नहीं कोई कनेक्शन 

तो क्या वाकई इनकी बात सच है। रोगियों के दावे को को लेकर इन्वेस्टिगेटर ने मरीजों के ई-डायरी में मौजूद जानकारी की जांच की। इसमें देखा गया कि कोरोना से संक्रमित होने या फिर वैक्सीन लगने के एक महीने पहले और बाद में सिरदर्द के पैटर्न में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं देखा गया। इतना ही नहीं जिन लोगों ने माइग्रेन को लेकर शिकायत की थी उनका भी पैटर्न पहले की तरह ही था। जिसके बाद यह तय किया गया कि कोविड और उसके वैक्सीन के बाद माइग्रेन की गंभीरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यूरोपियन जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में इस अध्ययन को प्रकाशित किया गया है।

डॉक्टर माइग्रेन पेशेंट की चिंता को करें दूर

स्टडी करने वाले लेखकों ने लिखा,'कोविड-19 के मामले में हमने पहले बताया था कि सिरदर्द वास्तव में संक्रमण का लगातार और परेशान करने वाला लक्षण है। फिर भी यह जरूरी नहीं कि यह माइग्रेन की बढ़ोतरी से जुड़ा हो। हमारा मानना है कि डॉक्टर को अपने पेशेंट की शंका को दूर करते हुए उन्हें बता देना चाहिए कि उनका माइग्रेन कोविड या वैक्सीन की वजह से नहीं बढ़ा है। यह जानकारी उनकी चिंता को दूर कर सकती हैं।

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