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सरोगेसी क्या है? भारत में सरोगेसी के नियम क्या हैं? बिना जाने किया तो हो सकती है दिक्कत
What Is Surrogacy: उपासना को लेकर सोशल मीडिया पर फैली सरोगेसी की अफवाहों पर राम चरण ने लगाई रोक। जानिए सरोगेसी क्या होती है, इसकी प्रक्रिया, प्रकार और भारत में इससे जुड़े कानून क्या कहते हैं। पूरी जानकारी आसान हिंदी में।

फेक न्यूज पर राम चरण ने लगाया ब्रेक
सोशल मीडिया पर ये फेक न्यूज वायरल हुई कि उपासना सरोगेसी से मां बनी हैं। इन अफवाहों पर रोक लगाने के लिए राम चरण ने एक फोटो पोस्ट की। उन्होंने डिलीवरी से पहले उपासना के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर करके इन बातों पर फुलस्टॉप लगा दिया। इसी वजह से सरोगेसी पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
सरोगेसी क्या होती है?
सरोगेसी एक ऐसी चिकित्सीय प्रक्रिया है, जो उन दंपतियों के लिए उम्मीद बनकर आती है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से संतान सुख नहीं मिल पाता। इस प्रक्रिया में एक महिला, जिसे सरोगेट मदर कहा जाता है, किसी अन्य दंपति के बच्चे को अपने गर्भ में धारण करती है और प्रसव के बाद बच्चे को उसके जैविक माता-पिता को सौंप देती है। यह व्यवस्था आमतौर पर तब अपनाई जाती है, जब महिला का गर्भधारण करना स्वास्थ्य की दृष्टि से संभव या सुरक्षित नहीं होता।
सरोगेसी की जरूरत क्यों पड़ती है?
कई बार महिलाओं को ऐसी चिकित्सीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें गर्भधारण जानलेवा हो सकता है। कुछ मामलों में गर्भाशय का न होना, बार-बार गर्भपात, गंभीर हार्मोनल समस्या या कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज भी कारण बनता है। इसके अलावा, जिन महिलाओं ने लंबा इलाज कराया हो या जिनकी सेहत गर्भावस्था को सहन करने की स्थिति में न हो, उनके लिए सरोगेसी एकमात्र विकल्प बन जाती है।
सरोगेसी की प्रक्रिया कैसी होती है?
सरोगेसी की शुरुआत विस्तृत मेडिकल जांच से होती है। इसके बाद इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु से लैब में भ्रूण तैयार किया जाता है। इस भ्रूण को सरोगेट मदर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। पूरे गर्भकाल के दौरान सरोगेट महिला डॉक्टरों की निगरानी में रहती है। प्रसव के बाद बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके जैविक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।
सरोगेसी के कितने प्रकार होते हैं?
सरोगेसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
1. जेस्टेशनल सरोगेसी: इसमें सरोगेट महिला का बच्चे से कोई जैविक संबंध नहीं होता। भ्रूण पूरी तरह माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु से तैयार किया जाता है। आज के समय में यही तरीका सबसे ज्यादा अपनाया जाता है।
2. ट्रेडिशनल सरोगेसी: इसमें सरोगेट महिला का अंडाणु उपयोग किया जाता है, जिससे उसका बच्चे से जैविक संबंध बनता है। भारत में इस तरीके को अब लगभग अपनाया नहीं जाता।
भारत में सरोगेसी को लेकर सख्त कानून बनाए गए हैं। व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल परोपकारी (Altruistic) सरोगेसी की अनुमति है, जिसमें कोई आर्थिक लेन-देन नहीं होता। कानून के अनुसार, सरोगेसी केवल करीबी रिश्तेदार के माध्यम से ही की जा सकती है। इसके लिए मेडिकल आवश्यकता, सरकारी अनुमति, रजिस्ट्रेशन और कानूनी दस्तावेज अनिवार्य हैं। इन नियमों का उद्देश्य महिलाओं के शोषण को रोकना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।

