हम सभी जानते हैं कि साइकिल चलाना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि इससे पुरुषों में नपुंसकता का खतरा भी बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कैसे।

लाइफस्टाइल डेस्क : पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना हो या अपने आप को चुस्त तंदुरुस्त और फिट रखना हो साइकिल चलाना हमेशा ही बेस्ट एक्सरसाइज माना जाता है। इससे आपके पैरों की मसल्स तो स्ट्रांग होती है। साथ ही फैट बर्न भी आसानी से होता है। इससे हार्ट हेल्थ भी तंदुरुस्त रहता है और मेंटल स्ट्रैंथ भी बढ़ती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साइकिल चलाने से पुरुषों में नपुंसकता का खतरा भी बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कैसे-

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स्टडी में हुआ खुलासा 
हाल ही में पोलैंड में व्रोकला मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च के अनुसार, साइकिल सीट पर लगातार बैठने से पुरुषों में के प्राइवेट पार्ट सुन्न हो जाते हैं और इससे प्राइवेट पार्ट की आर्टरीज पर दबाव पड़ता है, जिससे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो सकती है। 

इस तरह चलाएं साइकिल
रिसर्च में पाया गया कि जो पुरुष हफ्ते में 3 घंटे से ज्यादा साइकिल चलाते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा पाई गई है। ऐसे में रिसर्च में सुझाव दिया गया है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से बचने के लिए पुरुषों को साइकिल चलाते समय हर 10 मिनट में सीट से उठकर पैडल पर खड़े होना चाहिए। ज्यादा देर तक सीट पर बैठने से या गलत तरीके से साइकिल चलाने से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होने के साथ ही नपुंसकता की खतरा बढ़ सकता है।

क्या होता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन 
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन आपकी फर्टिलिटी हेल्थ पर प्रभाव डालता है। इसमें प्राइवेट पार्ट्स क्रश होने लगते हैं और नसों पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। साइकिलिंग के दौरान सीट पर लगातार बैठे रहने से प्राइवेट पार्ट और एनल के बीच बहुत ज्यादा दबाव पड़ने लगता है और इसी के कारण नसों को नुकसान पहुंचता है और धीरे-धीरे ब्लड फ्लो भी कम होने लगता है। जिससे प्राइवेट पार्ट सुन्न हो सकता है और इसमें झनझनाहट भी होने लगती है। जब यह समस्या लगातार होने लगती है, तो यह इरेक्टाइल डिस्फंक्शन में बदल जाता है, इसे ही सामान्य भाषा में नपुंसकता के रूप में जाना जाता है।

इन चीजों से बढ़ सकता है नपुंसकता का खतरा 
पुरुषों में नपुंसकता का खतरा सिर्फ साइकिल चलाने से ही नहीं बल्कि कई कारणों से भी बढ़ सकता है। जिसमें डायबिटीज, हार्ट संबंधी समस्याएं, तंबाकू का सेवन, मोटापा, प्रोस्टेट सर्जरी, कैंसर का ट्रीटमेंट, एंजाइटी, डिप्रेशन और अन्य चीजें भी शामिल है।

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