Famous Embroidery of Madhya Pradesh: सिल्क और जरी के अलावा भी भारत में ऐसी कढ़ाइयां हैं जो अपना अलग अंदाज रखती हैं। यहां जानें गोंड से भीला और बंजारा तक, मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध एंब्रॉयडरी के बारे में।

भारत की पारंपरिक कढ़ाइयों में ज्यादातर लोग चिकनकारी,जरी के बारे में जानते हैं। लेकिन देश में हर राज्य की अलग पहचान है, आज हम आपके लिए लेकर हैं भारत का दिल कहा जाने वाले मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध एंब्रॉयडरी की जानकारी, जो केवल कपड़े सजाने का माध्यम ही नहीं बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और प्रकृति से जुड़ाव का अनोखा उदाहरण हैं।

1) किरंदोरी कढ़ाई

यह कढ़ाई एमपी के मालवा क्षेत्र की पारंपरिक एंब्रऑयडरी है, जिसमें छोटे-छोटे रनिंग स्टिच को एक फोकस में रखकर चारों ओर फैलाया जाता है। यह दिखने में सूर्य की किरणों जैसे लगती हैं। इस तकनीक में मोटे सूती या फिर रेशमी धागों का इस्तेमाल होता है।

2) बंजारा कढ़ाई

मालवा और निमाड़ क्षेत्र में कटाउंटेड थ्रेड तकनीक प्रसिद्ध है। इसमें कपड़े पर पहले से किसी तरह की कोई डिजाइन नहीं होती है, बल्कि कारीगर कपड़े के ताने-बाने की गिनती करते हुए सीधे सुई से डिजाइन तैयार कर रहते हैं। यह पूरी कढ़ाई हाथ से की जाती है और हर टांका कपड़े की बुनाई के अनुसार लगाया जाता है, जिससे डिजाइन बेहद सटीक और टिकाऊ बनती है।

ये भी पढ़ें- ₹60 के मूली के बीज से पाएं बम्पर पैदावार, सिर्फ 45 दिन में फसल तैयार !

3) भोपाली जरी कढ़ाई

इस कढ़ाई में आरी नामक हुक वाली सुई का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत महीन फिनिशिंग है, जो मुख्य रूप से मखमल, सिल्क, ऑर्गेंजना और साटन जैसे शानदार कपड़ों पर की जाती है।

ये भी पढ़ें- चिकनकारी कुर्ता सेट 500 रु. के अंदर, उमस भरी गर्मी में रखेंगे आपको कूल

4) भोपाली जरदोजी कढ़ाई

भोपाल की जरदोजी कढ़ाई भारत की सबसे शानदार और रॉयल एंब्रॉयडरी में गिनी जाती है। इसमें साधारण सुई-धागे की मदद से सोने-चांदी के तार, नक्शी, सलमा, सितारों और मोतियों को कपड़ों पर टांका जाता है। इसकी खासियत है कि पहले कपड़े के नीचे रूई की परत रख जाती है, जिससे कढ़ाई ऊभरी हुई दिखाई दे।

5) गोंड कढ़ाई

गोंड जानजाति की कला पहले मिट्टी की दीवारों पर चित्रकारी के रूप में प्रसिद्ध थी लेकिन अब इसे कपड़ों पर भी उकेरा जा रहा है। इस एंब्रॉयडरी में साटन स्टिच, स्टेम स्टिच और चेन स्टिच का इस्तेमाल करके जानवरों, पेड़ों, पक्षियों और प्रकृति से जुड़े चित्र बनाए जाते हैं।

6) भील कढ़ाई

भील जनजाति की कढ़ाई उनकी प्रसिद्ध डॉटल पेंटिंग शैली से प्रेरित है। इसमें छोटे-छोटे बिंदुओं का इस्तेमाल करते हुए कपड़ों पर फ्रेंच नॉट, बुलियन नॉट और माइक्रो सैटिन स्टिच की मदद से डिजाइन उकेरी जाती है। आजकल यह कढ़ाई स्टोल, कुशन कवर, वॉल हैंगिंग भी लोकप्रिय हो रही है।