दिल्ली फैमिली कोर्ट ने शादी के 13 महीने बाद अलग हुई पत्नी को ₹5 लाख मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता सिर्फ जीने के लिए नहीं, बल्कि पति के रुतबे के अनुसार सम्मानजनक जीवन के लिए है।

नई दिल्लीः गुजारा भत्ते को लेकर दिल्ली की फैमिली कोर्ट (Delhi Family Court) ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शादी के 13 महीने बाद अलग हुई पत्नी को हर महीने 5 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह भी साफ किया है कि गुजारा भत्ता आखिर होता क्या है। अदालत ने स्पष्ट किया कि तलाक के बाद दी जाने वाली आर्थिक मदद सिर्फ गुजारा भत्ता नहीं, बल्कि सम्मान से जुड़ी बात है। कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ते का मतलब जानवरों की तरह जीना या अमानवीय हालात में रहना नहीं है। रखरखाव का मतलब सिर्फ गुजारा करने से कहीं ज़्यादा है।

आखिर क्या है गुजारा भत्ता?

रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता पत्नी को अपने पति के सामाजिक रुतबे के हिसाब से एक सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करता है। कोर्ट ने पति की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह दुबई में रहता है, इसलिए उसे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एक काबिल पति अपने कानूनी कर्तव्य से बच नहीं सकता और पत्नी को आर्थिक तंगी में नहीं डाल सकता।

तलाक (Divorce) के बाद पत्नी ने गुजारा भत्ते के लिए अर्जी दी थी। पति के वकील ने कोर्ट में इसका विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पत्नी पढ़ी-लिखी है, काम करने के काबिल है और अच्छी कमाई कर सकती है। वकील ने आरोप लगाया कि पत्नी ने अपनी पढ़ाई और कमाई के बारे में जानकारी छिपाई है। शादी सिर्फ 13 महीने चली। पत्नी बिना किसी खास वजह के घर छोड़कर चली गई। वकील ने यह भी कहा कि दंपति के कोई बच्चे नहीं हैं, इसलिए हर महीने 8 लाख रुपये देना मुमकिन नहीं है।

इस पर पत्नी के वकील ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि काम करने की क्षमता और असल में काम करना दो अलग-अलग बातें हैं। पत्नी शादी से पहले काम करती थी, लेकिन अब दोबारा काम पर जाना मुमकिन नहीं है। घर में हो रहे अत्याचार की वजह से उन्होंने पति का घर छोड़ा है। अब वह अपने परिवार पर निर्भर हैं। चूंकि पति एक अमीर व्यक्ति है, इसलिए उसे पत्नी को वही जीवन स्तर देना चाहिए जो वह शादी से पहले जी रही थी।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत अंतरिम गुजारा भत्ते की अर्जी पर सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट के जज देवेंद्र कुमार गर्ग ने पत्नी को 5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने दोहराया कि गुजारा भत्ता कानून का मकसद एक सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता सिर्फ जीने के लिए दिया जाने वाला पैसा नहीं है, बल्कि यह सम्मान, स्थिरता और गरिमा सुनिश्चित करने की एक कानूनी प्रक्रिया है।