जापान का बंदर 'पंच', जो अकेलेपन में खिलौने को गले लगाने के लिए मशहूर था, उसे अब 'मोमो-चान' नाम की गर्लफ्रेंड मिल गई है। दोनों के वीडियो वायरल हो रहे हैं और अब वह झुंड में बेहतर तरीके से घुल-मिल रहा है।
जापान के इचिकावा सिटी ज़ू के बंदर 'पंच' की कहानी में एक नया और प्यारा मोड़ आया है। पहले यह बंदर अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक संतरे रंग के सॉफ्ट टॉय को गले लगाकर दुनिया भर में मशहूर हुआ था। अब उसे 'मोमो-चान' नाम की एक गर्लफ्रेंड मिल गई है। दोनों के क्यूट वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं।
पंच को उसकी मां ने जन्म के बाद छोड़ दिया था, जिसके बाद ज़ू के स्टाफ ने उसे पाला-पोसा। इस वजह से उसे दूसरे बंदरों के साथ घुलने-मिलने में मुश्किल होती थी। लेकिन 15 मार्च से वायरल हो रहे वीडियो में पंच एक दूसरी बंदरिया के साथ काफी खुश नज़र आ रहा है। इंटरनेट यूजर्स ने प्यार से उसका नाम 'मोमो-चान' रख दिया है, जिसका जापानी भाषा में मतलब होता है 'छोटा आड़ू' (little peach)।
पंच और मोमो-चान को एक साथ खेलते, एक-दूसरे को गले लगाते और किस करते हुए देखा जा सकता है। ये वीडियो लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई लोगों का कहना है कि मोमो-चान दिखने में बिल्कुल वैसी ही है, जैसा पंच का खिलौना था।
एक-दूसरे का बने सहारा
एक वीडियो में दिखता है कि पंच ने अपना खिलौना पकड़ा हुआ है और मोमो-चान उसकी पूंछ खींचकर खेल रही है। फिर दोनों साथ में भागते हुए नज़र आते हैं। इंस्टाग्राम के 'बियॉन्ड द वाइल्डलाइफ' पेज ने रिपोर्ट किया है कि अब दोनों इतने करीब आ गए हैं कि उन्हें अलग करना मुश्किल है।
पंच का अकेलापन
पंच का जन्म जुलाई 2025 में हुआ था। जन्म के तुरंत बाद मां के छोड़ देने पर ज़ू के कर्मचारियों ने ही उसकी देखभाल की। इस वजह से वह अपने झुंड के दूसरे बंदरों के तौर-तरीके नहीं सीख पाया। फरवरी 2026 में पंच के वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें वह IKEA कंपनी का एक ऑरेंज रंग का ऑरंगुटान खिलौना गले लगाए दिखता था। मां का प्यार न मिलने पर यही खिलौना उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन गया था।
शुरू में जब पंच को झुंड में शामिल किया गया, तो लोगों को लगा कि दूसरे बंदर उसे परेशान कर रहे हैं। लेकिन ज़ू के अधिकारियों ने साफ किया कि यह बंदरों के झुंड का सामान्य व्यवहार है। वे उसे अनुशासन और झुंड में रहना सिखाने के लिए ऐसा कर रहे थे।
ज़ू की एक पोस्ट के मुताबिक, पंच अब हर दिन दूसरे बंदरों से ग्रूमिंग करवाता है, उन्हें तंग करता है और डांट भी खाता है। ये सभी संकेत हैं कि वह एक बंदर की तरह जीना सीख रहा है। ज़ू के कीपर कोसुके शिकानो ने उम्मीद जताई है कि, "एक दिन वह अपने खिलौने के बिना जीना सीख जाएगा।"
हालांकि पंच को अब मोमो-चान का साथ मिल गया है, लेकिन उसने अभी भी अपने खिलौने को पूरी तरह से नहीं छोड़ा है। पर उसकी सोशल लाइफ में बड़ा सुधार दिख रहा है। पंच और मोमो-चान की कहानी इस बात का सबूत है कि जानवरों की दुनिया में भी प्यार और दोस्ती कैसे जख्मों को भर सकती है। वैसे, जब पालतू या जंगली जानवर अपनी मां से बिछड़ जाते हैं, तो उन्हें सॉफ्ट टॉय देना उनके मानसिक तनाव को कम करने और सुरक्षा का एहसास दिलाने में मदद करता है।