Peekaboo:"तुम कहाँ हो?" "टुकी!"—ये छोटे-छोटे पल बच्चों को खुशी देते हैं, भावनाएँ व्यक्त करना सिखाते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि लुका-छिपी खेलने से दिमाग का विकास होता है।
Peekaboo Boosts Child mind: लुका-छिपी हम सबने बचपन में खेला है। लेकिन अब ये सिर्फ़ बच्चों का मन बहलाने वाला खेल नहीं रहा। बच्चों के साथ दोस्ती और उनके दिमागी विकास के लिए डॉक्टर माता-पिता को बच्चों के साथ लुका-छिपी खेलने की सलाह दे रहे हैं। इस खेल के फ़ायदे भले ही तुरंत नज़र न आएं, लेकिन लंबे समय में बच्चे के दिमाग के विकास और सामाजिक व्यवहार में लुका-छिपी काफ़ी मददगार साबित होती है।
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एक बार माता-पिता छुपेंगे, बच्चा ढूंढेगा, दूसरी बार बच्चा खुद छुपने की कोशिश करेगा, मां या पिताजी ढूंढेंगे। टुकी-धप्पा के इस खेल में बच्चा यूं ही खुले मन से बड़ा होगा।
लुका-छिपी खेलने से बच्चों का दिमागी विकास
एक मशहूर पत्रिका को दिए इंटरव्यू में मनोचिकित्सक अल्ताफ हुसैन ने इस बारे में माता-पिता को क्या सलाह दी, आइए जानते हैं।
- कई बच्चों को देखा जाता है कि वे परिवार या समाज में ठीक से घुल-मिल नहीं पाते। परिवार में सबके पास नहीं जाना चाहते, बात करने पर जवाब नहीं देते या हँसते नहीं। ऐसे बच्चों के लिए डॉक्टर घर पर लुका-छिपी खेलने की सलाह देते हैं। इससे दूसरों के साथ तालमेल बिठाकर बात करना, कब हँसना है या भावनाएँ कैसे व्यक्त करनी हैं, ये सब सीखने को मिलता है, दिमाग सक्रिय रहता है।
- लुका-छिपी खेलते हुए बच्चों के मन में दूसरे की अगली चाल का अंदाज़ा लगाने की उत्सुकता जगती है। उसी हिसाब से खुद भी सोच-समझकर अगला कदम उठाने की कला सीखते हैं। कई बार खुद को दूसरे की जगह रखकर सोचने की कोशिश करते हैं या बड़ों को देखकर वैसा ही व्यवहार करने की कोशिश करते हैं।
- कोई चीज़, कोई इंसान आँखों के सामने नहीं है, लेकिन आवाज़ सुनाई दे रही है, इससे डरने की बजाय बच्चों के मन में भरोसा पैदा होता है। बिछड़ने का डर कम होता है। जो इंसान छुपा है, वो वापस आएगा, ये भरोसा बनता है। ख़ासतौर पर कामकाजी माता-पिता के बच्चों के लिए ये सोच बहुत ज़रूरी है। कई मामलों में माता-पिता के तलाक के बाद बच्चे सामंजस्य नहीं बिठा पाते, ऐसे में माँ और पिता, दोनों के साथ रिश्ता बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
- अल्ताफ हुसैन कहते हैं, "दूसरों के साथ रिश्ता बनाना या दूसरों को खुश करने की कोशिश करना, या दूसरों को बिना दुःख पहुंचाए बात करना, इस तरह के व्यवहार के लिए हम अपने मरीज़ों को लुका-छिपी जैसे कई खेल खेलने की सलाह देते हैं। जिन बच्चों को बोलने में दिक्कत होती है, या ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (सामाजिक माहौल में बात न कर पाना, एक ही काम बार-बार करना, घुल-मिल न पाना) है, उनके लिए ये खेल ज़्यादा कारगर है।"


