पति को ‘पालतू चूहा’ कहना पत्नी को पड़ा भारी, HC ने कही ये बड़ी बात
Divorce Case in Bilaspur: पति-पत्नी का रिश्ता सम्मान पर टिका होता है। लेकिन जब यह टूट जाए, तो फिर रिश्ते में बने नहीं रहना चाहिए। कानून भी इस बात को मानती है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आया केस इसी की कहानी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछले साल एक अहम फैसले में पति पर मानसिक क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की मंजूर दे दी। हालांकि इसके साथ अदालत ने पत्नी को 5 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया। यह फैसला तब आया जब पत्नी ने पति को माता-पिता की बात मानने पर ‘पालतू चूहा’ कहा और उसके साथ मारपीट की।
क्या है पूरा मामला
यह मामला एक 39 साल के बैंक कर्मचारी पति और 34 साल के सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका पत्नी से जुड़ा है। दोनों की शादी 28 जून 2009 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। 5 जून 2010 को उनके एक बेटे का जन्म हुआ, जो वर्तमान में मां के साथ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में रह रहा है।
गर्भावस्था के दौरान गंभीर आरोप
पति ने कोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने गर्भावस्था के दौरान उस पर गर्भपात कराने का दबाव डाला और खुद पेट पर दबाव बनाकर भ्रूण को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
पति माता-पिता से अलग रहने के लिए दबाव बनाती थी
पति का कहना था कि वह अपने माता-पिता के साथ रहना चाहता था, लेकिन पत्नी लगातार उस पर अलग रहने का दबाव बनाती रही। जब उसने माता-पिता को छोड़ने से इनकार किया, तो पत्नी आक्रामक हो गई और कई बार उसके साथ मारपीट भी की, यहां तक कि उसकी मां के सामने भी उसे पीटा। उसने यह भी बताया कि पत्नी उसे माता-पिता की बात मानने पर अपमानजनक शब्दों से बुलाती थी और ‘पालतू चूहा’ कहती थी।
त्योहार के बहाने मायके गई, फिर कभी नहीं लौटी
पति के मुताबिक, पत्नी 24 अगस्त 2010 को तीज पर्व मनाने मायके गई और फिर कभी ससुराल वापस नहीं लौटी। बच्चे के जन्म से जुड़े किसी भी पारिवारिक कार्यक्रम में पति को न तो बुलाया गया और न ही जानकारी दी गई।
पत्नी ने क्या दलील दी
पत्नी ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि ससुराल वालों ने उसे कभी परिवार का हिस्सा नहीं माना। उसने आरोप लगाया कि पति उसे मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करता था, शराब के नशे में रहता था और उसके साथ गलत व्यवहार करता था। हालांकि, जिरह (Cross Examination) के दौरान पत्नी ने यह स्वीकार किया कि उसने पति को एक मैसेज भेजा था, जिसमें लिखा था कि अगर तुम अपने माता-पिता को छोड़कर मेरे साथ रहोगे तो जवाब देना, वरना मुझसे मत पूछना।
फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट का फैसला
फैमिली कोर्ट ने 2019 में पति को क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक दे दिया था। पत्नी ने इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पति पर माता-पिता को छोड़ने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता है। इसके साथ ही दो साल से ज्यादा समय ससुराल बिना कारण नहीं लौटना परित्याग की श्रेणी में आता है।
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