पति की याचिका पर हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ते के आदेश पर रोक लगा दी। पति का आरोप था कि पत्नी ने बिना तलाक दिए दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली है। कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून व IPC 498A के दुरुपयोग पर भी टिप्पणी की।

बेंगलुरु: "मेरी पत्नी ने मुझे तलाक दिए बिना दूसरे आदमी से शादी कर ली है। वह मुझसे गुजारा भत्ता लेकर उसके साथ अपनी शादी की सालगिरह मना रही है और खुशहाल जिंदगी जी रही है।" एक पति ने जब हाईकोर्ट में अपना यह दर्द बयां किया, तो कोर्ट ने भी हैरानी जताई। कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पति को हर महीने 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

यह मामला होसकोटे के रहने वाले रवि (बदला हुआ नाम) का है। उन्होंने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में रवि की पत्नी बृंदा (बदला हुआ नाम) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और सुनवाई अगली तारीख तक टाल दी है।

इस दौरान कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण का कानून ही नहीं, बल्कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला पर शारीरिक या मानसिक क्रूरता) का भी गलत इस्तेमाल हो रहा है।

दूसरे पति के साथ पत्नी का सेलिब्रेशन

सुनवाई के दौरान रवि के वकील ने कोर्ट को बताया, "सर, याचिकाकर्ता बृंदा के पहले पति हैं। बृंदा ने रवि के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत केस दर्ज कर गुजारा भत्ता हासिल किया है। लेकिन उन्होंने रवि को तलाक दिए बिना ही दूसरे शख्स से शादी कर ली है। हमने याचिका के साथ कुछ तस्वीरें लगाई हैं, जिनमें वह अपने दूसरे पति के साथ शादी की सालगिरह मनाती दिख रही हैं।"

इस पर जस्टिस ने पूछा, "मतलब, पत्नी पहले पति से गुजारा भत्ता लेकर दूसरे पति के साथ रह रही है?" वकील ने जवाब दिया, "जी सर। वह पहले पति के पैसों से दूसरे पति के साथ शादी की सालगिरह मनाकर एंजॉय कर रही हैं।"

यह सुनकर जस्टिस ने हैरानी से कहा, "ओहो! तो पहले पति से मिले गुजारे भत्ते के पैसे दूसरे पति के साथ जश्न मनाने पर खर्च हो रहे हैं।"

सिर्फ गुजारा भत्ता वसूलने के लिए केस?

रवि के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी पत्नी ने तलाक नहीं लिया है, लेकिन सिर्फ गुजारा भत्ता वसूलने के इरादे से रवि के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया है। यह साफ तौर पर कानून का दुरुपयोग है। इसलिए, निचली अदालत के गुजारा भत्ता देने के आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।

इन दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने कहा कि सिर्फ घरेलू हिंसा कानून ही नहीं, बल्कि IPC की धारा 498A का भी दुरुपयोग हो रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें रवि को अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए कहा गया था।