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गांधी जयंती पर कहां जाएं? 3 दिन की छुट्टी में घूम आएं बापू के ये 5 ऐतिहासिक ठिकाने
Gandhi Jayanti 2026: 2 अक्टूबर शुक्रवार को गांधी जयंती है, यानी शनिवार-रविवार जोड़कर 3 दिन छुट्टी। अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे, तो इस बार हिल स्टेशन की जगह इतिहास के उन जगहों पर जा सकते हैं, जहां बापू ने अपनी जिंदगी बिताई। जानिए ऐसी ही 5 जगहें

साबरमती आश्रम, अहमदाबाद
गांधी जी 1917 से 1930 तक यहीं रहे और यह स्वतंत्रता आंदोलन के मुख्य केंद्रों में रहा। यहीं से 12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा शुरू हुई और उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखना भी इसी आश्रम में 1920 के दशक में शुरू किया। यात्रा शुरू करते समय उन्होंने संकल्प लिया था कि आजादी मिलने तक वापस नहीं लौटेंगे और वे कभी लौटे भी नहीं। आश्रम में उनकी कुटिया 'हृदय कुंज' भी देखने लायक है।

सेवाग्राम आश्रम, वर्धा
यह आश्रम पैसों के हिसाब से भी दिलचस्प है। इतिहाकारों के मुताबिक, गांधी जी ने शर्त रखी थी कि उनकी कुटिया बनाने में किसी भी हाल में 500 रुपए से ज्यादा खर्च नहीं होगा और सामग्री स्थानीय ही ली जाएगी। वे यहां 1936 से 1948 में अपने निधन तक रहे। पास में शेगांव नाम का एक और गांव होने से उनकी चिट्ठियां भटक जाती थीं, इसलिए 1940 में नाम सेवाग्राम तय किया गया। परिसर में आदि निवास, बापू कुटी और बा कुटी जैसी जगहें देखी जा सकती हैं।
कीर्ति मंदिर, पोरबंदर
कीर्ति मंदिर के ठीक बगल में गांधी जी के परिवार का पुश्तैनी घर है, जहां 2 अक्टूबर 1869 को उनका जन्म हुआ। तीन मंजिला इस घर में उनकी माता पुतलीबाई के प्रसव वाली जगह स्वास्तिक से चिह्नित है और ऊपर की मंजिल पर उनका पढ़ने का कमरा है। जन्मदिन पर ठीक उसी जगह खड़े होने का अनुभव अलग है।
आगा खान पैलेस, पुणे
'भारत छोड़ो आंदोलन' के बाद महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और उनके सचिव महादेव देसाई को 9 अगस्त 1942 से 6 मई 1944 तक यहां नजरबंद रखा गया था। कस्तूरबा और महादेव देसाई दोनों का निधन यहीं हुआ और उनकी समाधियां परिसर में हैं। संग्रहालय में गांधी जी का चश्मा, खाने की मेज, चरखा और चप्पलें भी रखी हैं। यहां गांधी जयंती पर भारी भीड़ जुटती है।
राजघाट, दिल्ली
यहां हर शुक्रवार और हर 2 अक्टूबर को चरखा कताई और सर्वधर्म प्रार्थना सभा होती है। इस बार 2 अक्टूबर को शुक्रवार भी है, यानी राजघाट का यह आयोजन दोहरे मौके पर होगा। काले ग्रेनाइट के चबूतरे पर 'हे राम' लिखा है, जहां 31 जनवरी 1948 को उनका अंतिम संस्कार हुआ था। स्मारक तक पहुंचने से पहले चप्पल-जूते उतारने होते हैं। पास में तीस जनवरी मार्ग पर गांधी स्मृति भी है, जहां उनका कमरा आज भी वैसा ही रखा है जैसा उनके निधन वाले दिन था।
आर्टिकल सोर्स: गुजरात टूरिज्म, jamnalalbajajfoundation.org, mkgandhi.org, गांधी राष्ट्रीय स्मारक सोसाइटी और आउटलुक ट्रैवलर।

