एक वायरल पोस्ट के अनुसार, भारतीय माता-पिता Gen Z से परेशान हैं। वे चाहते हैं कि बच्चे उनकी तरह संघर्ष करें, पर Gen Z अनावश्यक कष्ट से बचकर तकनीक और सुविधा को अपना रही है। यह पीढ़ीगत सोच के टकराव को दर्शाता है।
अक्सर मां-बाप अपने बच्चों को अपनी पुरानी तकलीफों की कहानियां सुनाते हैं। 'तुम्हारी उम्र में हम मीलों पैदल चलकर स्कूल जाते थे', 'हमारे पास तो अच्छे कपड़े-जूते भी नहीं थे', 'खाने को अच्छा खाना नहीं मिलता था' जैसी बातें आम हैं। लेकिन अब X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें कहा गया है कि आजकल के मां-बाप एक अजीब सी उलझन में हैं, क्योंकि उनकी नई पीढ़ी यानी Gen Z बिना मतलब की मशक्कत करने को तैयार नहीं है।

प्रेम सोनी नाम के एक यूज़र ने ये पोस्ट शेयर की है। उनका कहना है कि कई मां-बाप ये बात पचा नहीं पा रहे कि उनके बच्चे पुरानी पीढ़ी की तरह जीना नहीं चाहते। पोस्ट की शुरुआत होती है, 'भारतीय मां-बाप एक बड़ी उलझन से गुज़र रहे हैं, क्योंकि Gen Z बिना किसी वाजिब वजह के कष्ट उठाने से इनकार कर रही है।' पोस्ट में लिखा है कि कई मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे Blinkit जैसे ऐप्स से किराना ऑर्डर करने के बजाय, सब्जी वाले से मोल-भाव करके अपना समय बर्बाद करें।
प्रेम सोनी आगे लिखते हैं कि मां-बाप बच्चों को अपनी कुर्बानी की कहानियां सुनाकर बड़ा करते हैं और फिर उम्मीद करते हैं कि बच्चे भी वैसी ही मुश्किलें झेलें। जैसे, Uber लेने के बजाय धक्के खाते हुए बसों में सफर करें। वो कहते हैं, 'मां-बाप चाहते हैं कि तुम भी वही कष्ट झेलो जो मैंने 1995 में झेला था।'
पोस्ट में एक मज़ेदार बात भी बताई गई है। जो पापा 30 मिनट तक मिडिल क्लास की मुश्किलों पर लेक्चर देते हैं, वही अपने स्मार्टफोन पर अपनी Zepto डिलीवरी भी ट्रैक कर रहे होते हैं। पोस्ट के आखिर में अपील की गई है, 'संघर्ष को महान बताना बंद कीजिए और उन्हें उस बेहतर दुनिया में जीने दीजिए, जो आपने उनके लिए बनाई है।' इस पोस्ट पर हज़ारों लोगों ने अपनी राय दी है। कई लोगों ने प्रेम सोनी की बात से सहमति जताई। वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि मां-बाप ऐसा इसलिए कहते हैं ताकि बच्चे पैसे की कीमत समझें और फिजूलखर्ची न करें।
