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कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हुए तो दिग्विजय ने किया ट्वीट, लिखा-'चाह गई चिंता मिटी', जानिए इसके मायने

कांग्रेस अध्यक्ष पद का मुकाबला अब दो ही उम्मीदवारों के बीच होगा कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर आमने-सामने हैं। खड़गे ने नामांकन दाखिल किया और उनके प्रस्तावकों में अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह, ए.के.एंटनी, अंबिका सोनी सहित तमाम नेता हैं। अब यह बेहद दिलचस्प होगा कि कौन पार्टी का हाईकमान बनेगा।
 

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First Published Oct 1, 2022, 4:03 PM IST

भोपाल. अब यह साफ हो गया है कि कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे और उनके सामने होंगे शशि थरूर। वहीं राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो गए हैं। उन्होंने खुद शुक्रवार को ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रस्तावक बनने की बात कही है। इसी बीच दिग्गी ने  रहीम दास का एक दोहा ट्वीट किया है। जिसकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।

कबीद के दोहे से कही अपनी बात- चाह गई चिंता मिटी...
दरअसल, अध्यक्ष पद से अपनी दावेदारी वापस लेने के एक दिन बाद दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट कर लिखा, 'चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बे परवाह, जाके कछु नहीं चाहिए, वे शाहन के शाह'। दिग्विजय इस दोहे के मुताबिक कहना चाहते हैं कि जिन्हें कुछ नहीं चाहिए वो राजाओं के राजा हैं क्योंकि उन्हें ना तो किसी चीज की चाहती होती और ना ही चिंता और मन तो बिल्कुल बेपरवाह है। 

कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का शिकार हो गए दिग्विजय सिंह 
बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम पीछे खींच लेने के बाद दिग्विजय अध्यक्ष पद के उम्मीदवार माने जा रहे थे। लेकिन अब वह प्रस्तावक बने हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का शिकार हो गए। क्योंकि उनको लगने लगा था कि उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा, इसलिए उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली। 

दिग्विजय ने कहा-में खड़गे जी के खिलाफ चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं सकता...
वहीं इस पूरे मामले को लेकर दिग्विजय का कहना है कि  गांधी परिवार ने चुनाव को खुला छोड़ रखा है। मैं तो यही मानता हूं, कोई भी चुनाव लड़ सकता है। खड़गे जी मुझसे सीनियर नेता हैं, खड़गे जी गांधी वादी व कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता हैं इसीलिए में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का सोच भी नही सकता। मैं उनका अब प्रस्तावक बनूंगा।
 

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