यह शर्मनाक घटना मध्य प्रदेश के अलीराजपुर की है। इस अभागे पिता को दुहरा दर्द झेलना पड़ा। एक तो उसने अपना मासूम बेटा खो दिया। दूसरा, बच्चे की लाश को हाथों में उठाकर घर के लिए ले जाना पड़ा।

अलीराजपुर(मध्य प्रदेश). यह शर्मनाक घटना आदिवासी बाहुल्य अलीराजपुर जिले की है। यहां एक गरीब पिता को अपने मासूम बच्चे की लाश को घर तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली। मामला मंगलवार का है। लिहाजा उसने रोते हुए अपने बच्चे की लाश हाथों में उठाई और पैदल ही घर के लिए चल पड़ा। पीछे-पीछे बच्चे की मां रोते हुए चली जा रही थी। यह दृश्य यहां के जिला हॉस्पिटल में दिखाई दिया। भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों ने टका-सा जवाब दिया कि अगर एम्बुलेंस चाहिए, तो डीजल का इंतजाम करो। हालांकि जैसे ही मामला बिगड़ते देखा, प्रबंधन ने गाड़ी का इंतजाम कराया।

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लोग मुर्दा बनकर खड़े रहे
कदम चौहान गांव अजंदा में रहते हैं। वे अपने एक साल के बच्चे को लेकर हॉस्पिटल आए थे। वो गंभीर बीमार था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जब बच्चे को शव को ले जाने की बात आई, तो हॉस्पिटल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए। डॉक्टर ने दो टूक कह दिया कि डीजल का इंतजाम करो, तभी एम्बुलेंस मिलेगी। कदम और उनकी पत्नी अपने बच्चे की लाश उठाए यहां-वहां मदद के लिए भटकते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पिघला। सब मुर्दे की तरह खड़े-खड़े तमाशा देखते रहे। फिर रोते हुए बच्चे की लाश हाथ में उठाकर पैदल ही घर के लिए निकल पड़े।

हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन पाटीदार ने बताया कि बदलते मौसम के कारण निमोनिया के मरीज बढ़ रहे हैं। इस बच्चे का भी निमोनिया बिगड़ गया था।