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एक रामभक्त ऐसा भी: जिसने मंदिर के लिए नहीं की शादी, पिता ने डांटा तो छोड़ दिया घर..ऐसे बिताए 28 साल


 5 अगस्त को देश के लाखों लोगों का वह सपना पूरा होने वाला है, जिसके लिए वो वर्षों से संघर्ष कर रहे थे। क्योंकि इस दिन पीएम नरेंद्र मोदी राम मंदिर की नींव रखेंगे। जैसी ही भूमि पूजन होगा भोपाल के रामभक्त रवींद्र गुप्ता की सालों की तपस्या भी पूरी हो जाएगी। 

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Bhopal, First Published Aug 4, 2020, 11:49 AM IST
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भोपाल (मध्य प्रदेश). अयोध्या में राम मंदिर की भूमि पूजन को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। कल यानी 5 अगस्त को देश के लाखों लोगों का वह सपना पूरा होने वाला है, जिसके लिए वो वर्षों से संघर्ष कर रहे थे। जैसे ही पीएम नरेंद्र मोदी मंदिर की नींव रखेंगे वैसे ही भोपाल के रहने वाले रामभक्त रवींद्र गुप्ता सालों की तपस्या भी पूरी हो जाएगी। 

पिता की डांस के बाद भी नहीं तोड़ा संकल्प
दरअसल, भोपाल लखेरापुरा के रहने वाले रवींद्र गुप्ता कार सेवक हैं।  28 साल पहले विवादित ढांचा गिरने पर उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक भगवान राम का मंदिर बनना शुरू नहीं होगा वो तब तक वह शादी नहीं करेंगे यानी अविवाहित रहेंगे। जैसे इस बात का पता उनके पिता को चला तो उन्होंने 22 वर्षीय रवींद्र को खूब डांट फटकार लगाई, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपना संकल्प नहीं तोड़ा।

चार बार मां नर्मदा की कर चुके हैं परिक्रमा
बता दें कि इन 28 सालों में रवींद्र 4 बार नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं, वह दिन रात भगवान राम का जप करते रहते हैं। इतना ही नहीं वह र्मदा परिक्रमाओं पर एक पुस्तक भी लिख रहे हैं। उनका कहना है कि अब बाकी जीवन भी वह मां नर्मदा की सेवा में ही लगाएंगे। लोग उनको भोजपाली बाबा के नाम से पुकारते हैं।

घर से बिना कपड़ों और खाली जेब निकल गए थे
रवींद्र बताते हैं कि 6 दिसंबर 1992 में मेरे कई जानने वाले अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे थे। जब मैंने अपने घरवालों से इस बारे में बात की तो उन्होंने जाने से मना कर दिया। लेकिन में बिना कपड़ों और बिना पैसे के ही घर से राम जन्मभूमि जाने के लिए निकल गया। फिर घरवाले भोपाल स्टेशन पर आए और मुझे कुछ रूपए दिए। फिर अयोध्या आने के बाद मैंने संकल्प ले लिया कि जब तक भव्य मंदिर नहीं बन जाता, विवाह नहीं करूंगा।

ऐसे बीता 28 साल का उनका सफर
बता दें कि रवींद्र गुप्ता ने करीब 12 साल 2004 तक भोपाल में विद्यार्थी परिषद और आरएसएस में सक्रिय रहे। फिर वह संघ के प्रचारक बन गए, इसके बाद  2007 में विश्व हिंदू परिषद में संगठन मंत्री हो गए। फिलहाल वह मां नर्मदा और राम नाम का जप कर रहे हैं। वह जल्द ही संन्यास लेने वाले हैं।
 

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