भीमा कोरेगांव मामले में न्यायिक जांच आयोग ने शरद पवार को नोटिस भेजा है। उनसे 5-6 मई को मुंबई में सुनवाई के दौरान गवाह के रूप में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। 

मुंबई। भीमा कोरेगांव मामले (Bhima Koregaon case) की जांच कर रहे न्यायिक जांच आयोग ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार को नोटिस भेजा है। उनसे 5 मई और 6 मई को मुंबई में सुनवाई के दौरान गवाह के रूप में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। फरवरी में जब आयोग ने पवार को तलब किया था तो उन्होंने आयोग से हलफनामा दाखिल करने के लिए और समय मांगा था और तब आयोग ने उन्हें और समय दिया था।

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जांच आयोग के वकील आशीष सतपुते ने बताया कि शरद पवार की ओर से कमीशन के समक्ष अब हलफनामा दायर किया गया है। इसलिए उन्हें आयोग ने 5 और 6 मई को गवाह के तौर पर तलब किया है। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त जांच आयोग 2018 भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच कर रहा है। 2 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव युद्ध के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में हिंसा भड़क उठी थी। इसके चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 10 पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने भीमा-कोरेगांव में झड़पों के बाद जनवरी में राज्यव्यापी बंद के दौरान 162 लोगों के खिलाफ 58 मामले दर्ज किए थे।

1 जनवरी 2018 को हुई थी हिंसा
बता दें कि 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई थी। आरोप है कि इसकी पटकथा एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को लिखी गई थी। पुणे के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद की बैठक हुई थी। इसमें प्रकाश अंबेडकर, जिग्नेश मेवाणी, उमर खालिद, सोनी सोरी और कई अन्य लोग शामिल हुए थे। 

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1 जनवरी को युद्ध स्मारक के पास हजारों दलित जुटे थे। इस दौरान भारी पथराव हुआ था। भीड़ ने कई गाड़ियों और दुकानों में तोड़फोड़ की। हिंसा के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई और 10 पुलिसकर्मियों समेत कई अन्य लोग घायल हो गए थे। NIA का आरोप है कि एल्गार परिषद के नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके चलते हिंसा हुई।

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