गोधरा में 59 कारसेवकों को जिंदा जलाने के मुख्य आरोपी रफीक हुसैन भटुक को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा दी है। वह घटना के 19 साल बाद पिछले साल गिरफ्तार हुआ था। उसने कभी मजदूर तो कभी फलवाला बनकर पुलिस को चकमा दिया। 

गांधीनगर। 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड के एक आरोपी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक आरसी कोडेकर ने कहा कि रफीक हुसैन भटुक को गोधरा सत्र अदालत ने हत्या की साजिश के लिए आजीवन कारावास की सजा दी है। गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी गई थी, जिससे अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे।

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19 साल बाद हुआ था गिरफ्तार
भटुक को गोधरा कांड के 19 साल बाद गिरफ्तार किया गया था। वह कभी मजदूर तो कभी फलवाला बनकर पुलिस को चकमा दे रहा था। पिछले साल फरवरी में उसे गोधरा से गिरफ्तार किया गया था। पंचमहल पुलिस और गोधरा पुलिस ने पंचमहल कस्बे के सिग्नल फलिया इलाके से भटुक को गिरफ्तार किया था। सिग्नल फलिया में वह ठेले पर फल बेचता था। स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2011 में भटुक के अलावा 31 आरोपियों को दोषी ठहराया था। दो अन्य आरोपियों को 2018 में और एक को 2019 में दोषी ठहराया गया था।

साजिश में शामिल था भटुक
भटुक गोधरा कांड का मुख्य आरोपी है। वह उस मुख्य भीड़ का हिस्सा था, जिसने ट्रेन को आग लगा दिया था। वह पूरी साजिश में भी शामिल था। उसपर साजिश रचने, भीड़ को उकसाने और ट्रेन के कोच जलाने के लिए पेट्रोल का इंतजाम करने के आरोप लगे थे। 

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दिल्ली भाग गया था भटुक
गोधरा कांड में जब नाम आया तो भटुक दिल्ली भाग गया था। वह काफी समय तक दिल्ली में भेष बदलकर रहा। वह रेलवे स्टेशनों पर और निर्माण स्थलों पर मजदूर के रूप में काम करता था। उसने ठेले पर फल और सब्जियां भी बेची। पुलिस लगातार उसका पीछा कर रही थी। वह कई बार अपने परिवार से मिलने गोधरा आया। पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह बच निकलने में कामयाब रहा था। काफी कोशिश के बाद पिछले साल वह पुलिस की पकड़ में आया था।

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27 फरवरी 2002 को साबरमती ट्रेन में लगाई गई थी आग
गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती ट्रेन में आग लगा दी गई थी। आग ट्रेन के एस 6 कोच में लगाई गई थी, जिससे 59 लोगों की मौत हुई थी। अहमदाबाद जाने के लिए साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन गोधरा स्टेशन से चली थी तभी किसी ने चेन खींचकर उसे रोक दिया था। इसके बाद भीड़ ने ट्रेन पर पथराव किया और एक डिब्बे में आग लगा दी। अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों की हत्या के बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। दंगों एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे।