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74वें गणतंत्र दिवस परेड में दिखी 'आत्मनिर्भर भारत' की झलक, दम दिखाने नहीं आया रूसी टैंक
नई दिल्ली। 74वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में आत्मनिर्भर भारत की झलक देखने को मिली। इस साल भारत में बने हथियारों को प्रदर्शित किया गया। किसी भी रूसी टैंक को परेड में शामिल नहीं किया गया। अर्जुन टैंक और नाग मिसाइल दिखाए गए।

अर्जुन टैंक
75 आर्मर्ड रेजीमेंट के मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन ने परेड में हिस्सा लिया। इसका आदर्श वाक्य 'साहसम् विजयते' है। अर्जुन टैंक को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। अर्जुन में 120mm का मेन गन, 7.62 mm का मशीन गन और 12.7mm का एंटी-एयरक्राफ्ट मशीन गन लगा है। टैंक को 1400 HP के डीजल इंजन से ताकत मिलती है। यह अधिकतम 70 km/h की रफ्तार से दौड़ सकता है।
नाग मिसाइल सिस्टम
17 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट की नाग मिसाइल सिस्टम का नेतृत्व लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ त्यागी ने किया था। नाम मिसाइल टैंकों को नष्ट करने के लिए बना है। इसे DRDO ने तैयार किया है। मिसाइल का रेंज 5 किलोमीटर है। इस मिसाइल को टॉप अटैक मोड में भी फायर किया जा सकता है।
ब्रह्मोस मिसाइल
परेड में सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को भी दिखाया गया। यह अपनी श्रेणी में दुनिया का सबसे घातक मिसाइल है। इसे रोक पाना लगभग असंभव है।
क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल
लड़ाई के वक्त जंग के मैदान में सैनिकों को तेजी से भेजने की जरूरत होती है। क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल (QRFV) इसी काम के लिए बना है। परेड में क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल का नेतृत्व 3 लद्दाख स्काउट्स रेजीमेंट के कैप्टन नवीन धतरवाल ने किया। इस 4x4 गाड़ी में 10 सैनिक सवार हो सकते हैं। इसमें 7.62mm का मशीन गन लगा हुआ है। इसकी टॉप स्पीड 80 km/h है।
शॉर्ट स्पैन ब्रिज
परेड में कैप्टन शिवाशीष सोलंकी के नेतृत्व में 64 असॉल्ट इंजीनियर रेजिमेंट का 10 मीटर शॉर्ट स्पैन ब्रिज शामिल हुआ। इसे डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किया गया है। यह मिनटों में नहर या नालों को पार करने के लिए पुल बना सकता है ताकि सैनिकों, टैंकों और अन्य गाड़ियों को आगे भेजा जा सके।
मोबाइल नेटवर्क केंद्र
परेड में मोबाइल माइक्रोवेव नोड और मोबाइल नेटवर्क केंद्र शामिल हुआ। कोर ऑफ सिग्नल के मोबाइल माइक्रोवेव नोड और मोबाइल नेटवर्क सेंटर का नेतृत्व 2 एएचक्यू सिग्नल रेजिमेंट के मेजर मोहम्मद आसिफ अहमद ने किया। इसका काम जंग के मैदान में सेना को संचार की सुविधा प्रदान करना है।
बख्तरबंद वाहन
परेड में WHAP (पहिया वाला बख्तरबंद वाहन) शामिल हुआ। यह 8x8 वाहन है। नदी, नाला हो या पहाड़ या रेगिस्तान, यह हर तरह के दुर्गम इलाके में सैनिकों को पहुंचा सकता है। यह 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार से दौड़ सकता है।
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