केएसएलएम की निदेशक पी एस श्रीकला ने कहा कि परियोजना पूरी होने के साथ ही यह जगह यूनेस्को द्वारा तय मानकों के अनुसार देश का पहला पूर्ण साक्षर आदिवासी प्रखंड बन जाएगा।

तिरुवनंतपुरम. केरल की बेहद पिछड़ी जनजातीय बस्ती अत्ताप्पादी जो लंबे समय तक शिशु मृत्यु दर, कुपोषण, गरीबी और पिछड़ेपन जैसी गलत वजहों के कारण चर्चा में रही, वह अब धीरे-धीरे बेहतरी की तरफ बढ़ रही है। पलक्कड़ जिले के पश्चिमी घाट की नीलगिरि पहाड़ियों की तलहटी में स्थित यह बस्ती दुर्लभ उपलब्धि हासिल करने की राह पर है जिसके तहत जल्द ही यह देश का पहला पूर्ण साक्षर आदिवासी खंड बन जाएगा।

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27 सितंबर को शुरू होगा तीसरा चरण 
आधिकारिक सूत्रों ने यहां कहा कि हर चीज अगर योजना के मुताबिक चलती है तो यह उपलब्धि एक साल के भीतर हासिल की जा सकती है और इस संबंध में आधिकारिक घोषणा जून 2020 तक किए जाने की उम्मीद है। वंचित समूहों के बीच पूर्ण साक्षरता हासिल करने के लिए कई कार्यक्रमों को लागू कर रहा केरल राज्य साक्षरता मिशन (केएसएलएम) अत्ताप्पादी में 27 सितंबर को अपने साक्षरता कार्यक्रम के तीसरे चरण की शुरुआत करेगा।

यूनेस्को के मानकों पर उतरेगा खरा 
केएसएलएम की निदेशक पी एस श्रीकला ने कहा कि परियोजना पूरी होने के साथ ही यह जगह यूनेस्को द्वारा तय मानकों के अनुसार देश का पहला पूर्ण साक्षर आदिवासी प्रखंड बन जाएगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के मुताबिक अगर किसी स्थान की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी साक्षर है तो उसे पूर्ण साक्षर घोषित किया जा सकता है।

[यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है]