भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने प्रत्याशी चुनने के लिए कई लेयर वाली प्रक्रिया अपनाई है। दो साल से पार्टी अपने सांसदों के काम के बारे में जानकारी जुटा रही है।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Elections 2024) के लिए बिगुल बजने को है। इससे पहले जल्द ही भाजपा द्वारा उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की जा सकती है। इसमें 100 से अधिक प्रत्याशियों के नाम होने की उम्मीद है। 2019 के आम चुनाव में भाजपा को 303 सीटों पर जीत मिली थी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात भाजपा के CEC (Central Election Committee) की बैठक हुई। इसमें पहली लिस्ट के प्रत्याशियों के नाम तय किए गए। भाजपा द्वारा प्रत्याशी का नाम लंबी प्रक्रिया के बाद तय किया जाता है। इसके लिए जमीनी स्तर पर फीडबैक लिया जाता है। सांसद ने किस तरह अपने क्षेत्र में काम किया, इसकी जानकारी ग्राउंड जीरो से जुटाई जाती है। इसी आधार पर तय किया जाता है कि उस सांसद को फिर से टिकट मिलेगा या नहीं। आइए भाजपा में प्रत्याशी के नाम तय करने की प्रक्रिया के बारे में जानते हैं।

प्रत्याशी के चुनाव के लिए अपनाई जाती है कई लेयर वाली प्रक्रिया

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा द्वारा प्रत्याशी के चुनाव के लिए कई लेयर वाली विस्तृत प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके लिए उम्मीदवारों के बारे में सार्वजनिक स्तर से जानकारी जुटाई जाती है। उससे संसदीय क्षेत्र से पता किया जाता है कि संबंधित नेता कितना लोकप्रिय है और इलाके में कितना काम किया है। इसके साथ ही आंतरिक मूल्यांकन और हाई लेवल रणनीतिक चर्चाओं के बाद उम्मीदवार का नाम तय होता है।

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उम्मीदवार चुनने के लिए भाजपा ने टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। Namo App की मदद से पार्टी ने जमीनी स्तर पर लोगों से मौजूदा सांसदों के प्रदर्शन पर राय मांगी है। लोगों से उनके क्षेत्र के तीन सबसे लोकप्रिय नेता के नाम बताने को कहा गया था। इस पहल का उद्देश्य था कि ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया जाए जो अपने क्षेत्र में लोकप्रिय हो।

दो साल से सांसदों का फीडबैक ले रही भाजपा

दो साल से अधिक समय से भाजपा अपने सांसदों के बारे में लगातार फीडबैक ले रही है। भाजपा सांसदों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर रही है। भाजपा ने प्रत्येक संसदीय क्षेत्र पर रिपोर्ट जुटाने के लिए सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों की मदद ली है। मंत्रियों से कहा गया कि वे लोकसभा क्षेत्रों में जाएं और वहां से सांसदों द्वारा किए गए काम पर रिपोर्ट दें।

सभी फीडबैक और पार्टी द्वारा जुटाई गई जानकारियों पर राज्य-स्तरीय चुनाव समिति की बैठकों में चर्चा की गई। इसके बाद उम्मीदवारों के नामों पर प्रत्येक राज्य के मुख्य भाजपा समूह ने जेपी नड्डा, अमित शाह और महासचिव बीएल संतोष जैसे शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा की। इसके बाद पार्टी नेतृत्व द्वारा उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जा रही है।

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काटे जा सकते हैं 60-70 सांसदों के टिकट

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 60-70 सांसदों के टिकट काटे जा सकते हैं। इनकी जगह पार्टी नए चेहरों को मौका दे सकती है। पार्टी द्वारा ओबीसी समुदाय के उम्मीदवारों को अधिक टिकट दिए जाने की उम्मीद है। 2019 के चुनाव में भाजपा के 85 ओबीसी सांसद विजयी हुए थे।