जम्मू-कश्मीर के राजौरी में लैंड माइन धमाके में शहीद हुए लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार(Lt Rishi Kumar) का 1 नवंबर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

बेगूसराय. जम्मू-कश्मीर के राजौरी में लैंड माइन(landmine) धमाके में शहीद हुए लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार(Lt Rishi Kumar) का 1 नवंबर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को बिहार के बेगूसराय लाया गया। यहां जीडी कॉलेज परिसर में सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी। लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार शनिवार को राजौरी में धमाके में शहीद हो गए थे। उनका अंतिम संस्कार सिमरिया घाट पर किया गया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। गिरिराज सिंह बेगूसराय के ही रहने वाले हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है। (तस्वीर में लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार और मंजीत सिंह)
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बहन की शादी में आने का किया था वादा
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में एक इलाके में गश्त के दौरान शहीद हुए दो सैनिकों में से एक लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार ने अपनी बहन की शादी के लिए घर लौटने का वादा किया था। भारतीय सेना के अधिकारी घर लौट आए लेकिन तिरंगे में लिपट गए। बेगूसराय के रहने वाले लेफ्टिनेंट ऋषि, 30 अक्टूबर को ऑपरेशन के दौरान एक बारूदी सुरंग पर कदम रखने के बाद सिपाही मंजीत सिंह के साथ शहीद हो गए थे। मंजीत सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के सिरवेवाला का रहने वाले थे। ऋषि कुमार लगभग दो महीने पहले ही कश्मीर में 17 सिख लाइट इन्फैंट्री के हिस्से के रूप में तैनात हुए थे। उन्होंने भारतीय सेना में मुश्किल से एक साल पूरा किया था।

भारतीय सेना के अधिकारियों द्वारा लेफ्टिनेंट ऋषि की मौत की खबर बताए जाने के बाद परिवार में मातम छा गया। नवंबर के अंत में ऋषि की छोटी बहन की शादी होनी थी। ऋषि ने शादी से एक हफ्ते पहले घर लौटने का वादा किया था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि लेफ्टिनेंट ऋषि ने 27 अक्टूबर को अपनी मां से वादा किया था कि वह छठ पूजा के लिए घर लौट आएंगे, लेकिन वह वादा नहीं निभा सके। यह आखिरी बार था, जब उन्होंने अपनी मां से बात की थी। उनकी बड़ी बहन भी भारतीय सेना का हिस्सा हैं।

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बलिदान याद रखेगा देश
भारतीय सेना ने एक बयान में कहा कि कि दोनों कर्मी बहादुर थे और अपने पेशे के लिए बेहद प्रतिबद्ध थे। उन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए बहादुर दिलों का हमेशा ऋणी रहेगा।

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