केंद्रीय कैबिनेट ने 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' को मंजूरी दे दी है। ₹5,070 करोड़ की इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे, जिनमें एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी होगा। इससे देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी।

नई दिल्ली [भारत], 1 अगस्त (एएनआई): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (पीएम-एसएसवाई)' को मंजूरी दे दी। यह योजना एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ईएसएस) के साथ फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (एफएसपीवी) परियोजनाओं के विकास के लिए है, जिस पर कुल 5,070 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

कैबिनेट के अनुसार, इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इनके साथ ही न्यूनतम दो घंटे की भंडारण क्षमता वाले एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाए जाएंगे, यानी इनकी क्षमता 10,000 MWh होगी।

इन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान मंजूरी दी जाएगी, जबकि वित्तीय सहायता का वितरण वित्तीय वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा।

योजना का उद्देश्य और वित्तीय सहायता

यह मंजूरी राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) द्वारा किए गए हालिया मूल्यांकन के बाद दी गई है। एनआईएसई ने देश भर के जलाशयों और अन्य उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में लगभग 102.18 GWp की फ्लोटिंग सोलर क्षमता का अनुमान लगाया है।

योजना के तहत, पात्र फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं के सफलतापूर्वक शुरू होने के बाद प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, परियोजना के विकास से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन के लिए प्रति परियोजना 50 लाख रुपये तक की सीएफए उपलब्ध होगी। इसमें बाथिमेट्री और हाइड्रोग्राफी मूल्यांकन, पर्यावरण अध्ययन और अन्य तैयारी गतिविधियां शामिल हैं।

योजना के प्रमुख लाभ

इस योजना से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लाभ होगा। यह योजना देश में फ्लोटिंग सोलर पीवी क्षमता को 5,000 मेगावाट तक बढ़ाएगी, जो वर्तमान में केवल 700 मेगावाट के आसपास है। ये परियोजनाएं मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का लाभकारी उपयोग करने का अवसर प्रदान करेंगी और दुर्लभ भूमि संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा को खत्म करेंगी।

एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को एकीकृत करने से ग्रिड की विश्वसनीयता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

यह योजना सालाना लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी।

इससे परियोजना की पूरी वैल्यू चेन में लगभग 16,000-17,000 पूर्णकालिक समकक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।

यह योजना फ्लोटेशन सिस्टम के घरेलू विनिर्माण के साथ-साथ पीवी सेल, मॉड्यूल, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम आदि जैसी परियोजनाओं की पूरी वैल्यू चेन को भी बढ़ावा देगी और 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण का समर्थन करेगी।

यह योजना नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि करने, राष्ट्रीय ऊर्जा और जलवायु उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता करने, और जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने में योगदान देगी, साथ ही 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी। (एएनआई)

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