केंद्र सरकार ने CAA लागू कर दिया है। इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए अल्पसंख्यकों (इन देशों में) को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इससे किसी की नागरिकता खत्म नहीं होगी। 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल बजने से पहले सोमवार को बड़ा फैसला करते हुए CAA (Citizenship Amendment Act) लागू कर दिया। पांच साल पहले इसे दिसंबर 2019 में संसद से पास किया गया था। यह नागरिकता देने का कानून है। इससे किसी भारतीय की नागरिकता खत्म नहीं होगी। इसलिए इस कानून से किसी को नुकसान नहीं होगा।

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CAA की मदद से 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन किया गया है। इसके अनुसार अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई समुदायों से आने वाले प्रवासियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इसका लाभ उन्हें मिलेगा जो अपने देशों में धार्मिक उत्पीड़न के चलते 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हों।

CAA के अंतर्गत क्या-क्या आता है?

केंद्र सरकार का कहना है कि CAA का लक्ष्य उन लोगों को राहत पहुंचाना है जो धर्म के आधार पर उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। इसकी मदद से उन्हें अवैध प्रवासन कार्यवाही से बचाया जाएगा और भारत की नागरिकता दी जाएगी।

वर्तमान में भारतीय नागरिकता उन लोगों को दी जाती है जो भारत में पैदा हुए हैं या जो कम से कम 11 वर्षों से यहां रह रहे हैं। CAA में भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान शामिल है। यह कार्रवाई तब की जा सकती है जब ओसीआई कार्डधारक नागरिकता अधिनियम या किसी अन्य लागू कानून का उल्लंघन करता है।

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पूर्वोत्तर के कितने हिस्से को कवर करता है CAA?

CAA संविधान की छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों या इनर-लाइन परमिट व्यवस्था वाले राज्यों पर लागू नहीं होता है। सीएए के खिलाफ असम में विशेष रूप से उग्र विरोध देखा गया था। यहां के लोगों को डर है कि सीएए के तहत बांग्लादेश से अवैध बंगाली हिंदू प्रवासियों को नियमित करने से राज्य के सांस्कृतिक और भाषाई ताने-बाने को खतरा हो सकता है।

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