रायपुर की पोलियो पीड़ित मितानिन रूपा साहू 20 साल से घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की ड्रॉप पिला रही हैं। उनका सपना है कि जो दर्द उन्होंने सहा, वो किसी और बच्चे को न मिले। अब तक वे 5000 से ज्यादा बच्चों को वैक्सीन दे चुकी हैं।

रायपुर (छत्तीसगढ़) [भारत], 4 अगस्त (एएनआई): छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पोलियो से पीड़ित एक मितानिन पिछले 20 सालों से घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की वैक्सीन पिला रही हैं। उनकी बस यही भावना है कि जो दर्द उन्होंने सहा, वह किसी और बच्चे की किस्मत में न आए।

रायपुर के अभनपुर ब्लॉक के बड़ौदा गांव की पोलियो पीड़ित मितानिन रूपा साहू पिछले 20 सालों से घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की वैक्सीन पिला रही हैं। उनका बस एक ही सपना है कि किसी भी बच्चे को उस दर्द और लाचारी के साथ न जीना पड़े, जिसे उन्होंने पूरी जिंदगी सहा है। यही संकल्प उन्हें हर मौसम, मुश्किल और चुनौती के बीच लगातार लोगों तक पहुंचने की ताकत देता है।

20 साल से जारी है मिशन

रूपा साहू 2006 से मितानिन के रूप में काम कर रही हैं। अब तक वह 5000 से ज्यादा बच्चों को पोलियो की वैक्सीन पिला चुकी हैं। अगर कोई बच्चा टीकाकरण कैंप में छूट जाता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से उसके घर जाकर पोलियो की ड्रॉप पिलाती हैं। जब माता-पिता hésitate करते हैं या मना करते हैं, तो वह पोलियो के कारण अपने सामने आने वाली चुनौतियों और समस्याओं को साझा करती हैं।

दर्द को बनाया ताकत

रूपा साहू ने कहा, "जब से मैं मितानिन बनी हूं, मैंने एक ही लक्ष्य रखा है कि कोई भी बच्चा उस दर्द से न गुज़रे जिससे मैं गुज़री हूं। मैं खुद पोलियो के कारण दिव्यांग हूं और जानती हूं कि एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए जीवन कितना कठिन होता है। बचपन किसी तरह कट जाता है, लेकिन जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, हर कदम एक संघर्ष होता है, और अक्सर आपको अपनी खुशियों को दबाना पड़ता है।"

उन्होंने आगे बताया कि उनके जीवन में बहुत कठिनाइयां हैं, और जब भी वह संघर्षों को याद करती हैं, तो उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह अपने दर्द को एक मिशन में बदल देती हैं, और उनकी एकमात्र इच्छा है कि भविष्य में किसी भी बच्चे को पोलियो के कारण होने वाले दर्द और लाचारी का सामना न करना पड़े। हर बार जब वह किसी बच्चे को पोलियो की वैक्सीन पिलाती हैं, तो साहू को अपना बचपन याद आ जाता है, जो दर्द और चुनौतियों से भरा था।

लोग उठाते थे काबिलियत पर सवाल

ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शीलू साहू के अनुसार, पोलियो से पीड़ित होने के बावजूद, रूपा साहू अपने घर के सभी काम स्वतंत्र रूप से करती हैं और अपनी जिम्मेदारियों को भी ईमानदारी से निभाती हैं। शुरुआत में, कई लोगों ने सवाल उठाया कि वह क्या कर पाएंगी और यहां तक कि उनकी क्षमताओं पर भी संदेह जताया। रूपा साहू हर कार्यक्रम को पूरी जिम्मेदारी से करती हैं, जिसमें होम विजिट, पल्स पोलियो अभियान, मातृ देखभाल, संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य सर्वेक्षण शामिल हैं। उनका बस एक ही सपना है: कि इस इलाके का कोई भी बच्चा पोलियो का शिकार न हो।

स्थानीय निवासी सेवती साहू ने कहा, "रूपा साहू एक मितानिन के रूप में काम करती हैं और बच्चों व गर्भवती महिलाओं की देखभाल करती हैं। वह उन्हें खान-पान की आदतों, क्या परहेज करना है और छोटे बच्चों को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है, इस पर मार्गदर्शन देती हैं।" स्थानीय ने आगे कहा कि जैसे ही उन्हें पता चलता है कि इलाके में कोई महिला गर्भवती है या जन्म देने वाली है, रूपा साहू अपनी ट्राइसाइकिल पर बैठकर उनके पास जाती हैं और गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण और देखभाल की सलाह देती हैं।

मितानिन देवकी साहू ने कहा, "मैं 2003 से स्वास्थ्य मितानिन के रूप में काम कर रही हूं और लगभग 20 सालों से रूपा साहू के साथ काम किया है। पोलियो से दिव्यांग होने के बावजूद, रूपा गांव-गांव और घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाती हैं। लोग कभी-कभी उनकी दिव्यांगता पर सवाल उठाते हैं, लेकिन किसी की परवाह किए बिना, वह अपना काम पूरी लगन और मेहनत से करती हैं। वह हमेशा कहती हैं, 'जो दर्द मैंने सहा है, वह किसी और बच्चे को कभी न मिले'।" (एएनआई)

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