राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा को 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आनंद शर्मा ने अपना इस्तीफा भेजते हुए कहा कि वह राज्य में खुद को असहज पा रहे थे। पार्टी के फैसलों में उनको शामिल नहीं किया जा रहा था।

नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) में एक बार फिर बगावत तेज हो गई है। जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) के बगावती तेवर के बाद अब हिमाचल में बागी तेवर देखने को मिल रहे हैं। पार्टी के सीनियर लीडर आनंद शर्मा (Anand Sharma) ने हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मिली अपनी नई जिम्मेदारी से इस्तीफा दे दिया है। आनंद शर्मा, राज्य कांग्रेस की संचालन समिति के चीफ थे। शर्मा ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में खुद को उपेक्षित महसूस करता हुआ बताया है। राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और पार्टी में इस तरह की फूट कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

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पहले ही गुलाम नबी आजाद ने दिया इस्तीफा

कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व को लेकर दो दर्जन के आसपास सीनियर लीडर्स ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। जी-23, के नाम से विख्यात इस समूह के बागी तेवर समय-समय पर दिखते रहे हैं। गुलाम नबी आजाद ने कुछ ही दिनों पहले जम्मू-कश्मीर में मिली अपनी एक जिम्मेदारी को छोड़ दिया। उन्होंने अपनी नियुक्ति के कुछ घंटे बाद ही इस्तीफा दे दिया था। वह चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन बनाए गए थे लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। वह राजनीतिक मामलों के पैनल के भी अध्यक्ष थे जिसे तत्काल प्रभाव से छोड़ दिया था।

क्या कहा है आनंद शर्मा ने इस्तीफा देते हुए?

राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा को 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आनंद शर्मा ने अपना इस्तीफा भेजते हुए कहा कि वह राज्य में खुद को असहज पा रहे थे। पार्टी के फैसलों में उनको शामिल नहीं किया जा रहा था। उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंची है क्योंकि उन्हें पार्टी की किसी भी बैठक में सलाह या आमंत्रित नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह हिमाचल प्रदेश में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करना जारी रखेंगे।

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