सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ईडी द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट का फैसला शाम चार बजे आएगा। पांच बार समन जारी किए जाने के बाद भी केजरीवाल पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली शराब घोटाला (Delhi Liquor Scam) में हुए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी (Enforcement Directorate) द्वारा पांच समन दिए जाने के बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए हैं। ईडी उनसे दिल्ली आबकारी नीति मामले (liquor policy case) में पूछताछ करना चाहती है। इसको लेकर राउज एवेन्यू कोर्ट से केजरीवल को झटका मिला है। एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को अगले 17 फरवरी को कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया है।

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पांच समन दिए जाने के बाद भी केजरीवाल पेश नहीं हुए तो ईडी ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने फैसला शाम चार बजे आया। फैसला आने के साथ ही तय हो गया कि केजरीवाल ईडी के सामने 17 फरवरी को पेश होंगे।

एक्साइज पॉलिसी घोटाला में केजरीवाल से पूछताछ करना चाहती है ईडी

तीन फरवरी को ईडी केजरीवाल के खिलाफ कोर्ट गई थी। इसमें कहा गया था कि केजरीवाल से एक्साइज पॉलिसी घोटाला में हुए मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में पूछताछ करनी है। बार-बार समन देने पर भी वह नहीं आ रहे हैं। शिकायत अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा के समक्ष दायर की गई थी।

सुनवाई के दौरान बुधवार को सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि किसी और दलील की जरूरत नहीं है। केजरीवाल पिछले 4 महीनों में चार पूर्व सम्मनों के बावजूद ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं। उन्होंने समन को अवैध बताया है।

केजरीवाल ने ईडी के समन को बताया है राजनीति से प्रेरित

दरअसल, केजरीवाल ने समन के जवाब में ईडी को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि समन अवैध और राजनीति से प्रेरित है। ईडी का उद्देश्य उन्हें चुनाव प्रचार करने से रोकना है। इस बीच आप ने दावा किया कि केंद्र सरकार केजरीवाल सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। आप की ओर से कहा जा रहा है कि ईडी की तैयारी केजरीवाल को गिरफ्तार करने की है। दिल्ली शराब घोटाला केस में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आप के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया पहले से जेल में बंद हैं।

क्या है शराब नीति घोटाला?

दिल्ली सरकार मार्च 2021 में नई एक्साइज पॉलिसी लेकर आई थी। इसे नवंबर 2021 में लागू किया गया था। उस वक्त मनीष सिसोदिया उपमुख्यमंत्री होने के साथ ही आबकारी विभाग के मंत्री भी थे। आरोप लगे थे कि शराब के लाइसेंस देने में गड़बड़ी की गई। करीबी कारोबारियों को गलत तरीके से लाइसेंस दिए गए और इसके बदले रिश्वत ली गई। मामले के तूल पकड़ने पर दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई को जांच का निर्देश दिया था। इस बीच दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी को रद्द कर दिया और पुरानी नीति को लागू कर दिया। इस मामले में सीबीआई ने FIR दर्ज किया और जांच शुरू की। सीबीआई ने 27 फरवरी 2023 को सिसोदिया को गिरफ्तार किया था।