भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चल रही बातचीत के बावजूद चीन भारत को धमकियां दे रहा है। चीन के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने लिखा कि अगर भारतीय सेना लद्दाख की पैंगॉन्ग त्सो झील के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेगी तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भी पूरे ठंड के मौसम में वहीं टिकी रहेगी। मुखपत्र में चीन ने लिखा कि दोनों देशों के बीच यदि युद्ध होता है तो भारतीय सेना की उसमें हार होगी। 

नई दिल्ली. भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चल रही बातचीत के बावजूद चीन भारत को धमकियां दे रहा है। चीन के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने लिखा कि अगर भारतीय सेना लद्दाख की पैंगॉन्ग त्सो झील के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेगी तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भी पूरे ठंड के मौसम में वहीं टिकी रहेगी। मुखपत्र में चीन ने लिखा कि दोनों देशों के बीच यदि युद्ध होता है तो भारतीय सेना की उसमें हार होगी।

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चीन के मुखपत्र ने भारतीय सैन्य तंत्र को कमजोर बताते हुए लिखा कि भारतीय सैनिक क्षेत्र में कड़ाके की ठंड से मर जाएंगे। भारत यदि क्षेत्र में शांति चाहता है तो दोनों देशों को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की 7 नवंबर 1959 के समझौते को मानना होगा। लेकिन यदि भारत शांति की बजाय युद्ध चाहता है तो यह देखने वाली बात होगी कि कौन सा देश दूसरे को मात देगा।

इधर रूस में, दोनों देशों के बीच 5 पॉइंट पर सहमति

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की गुरुवार शाम रूस के मॉस्को शहर में बातचीत हुई। इस बातचीत में भारत-चीन विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच 5 पॉइंट के प्लान पर सहमति बनी है। बता दें कि रूस ने भारत चीन सीमा विवाद को आपसी मामला बताते हुए मध्यस्थ होने से मना कर दिया है।

इन पॉइंट्स पर बनी सहमति

1. दोनों देशों के जवानों को बातचीत जारी रखते हुए तेजी से डिसएंगेजमेंट (विवादित इलाकों से सैनिकों की वापसी ) करना चाहिए।

2. स्पेशल रिप्रेजेंटेशन (एसआर) मैकेनिज्म के ज़रिए होगी दोनों देशों में बात।

3. सीमा के इलाक़ों में शांति बरकरार रखते हुए मौजूदा समझौतों का पालन हो।

4. आपसी भरोसा बढ़ाते हुए दोनों देशों को स्तिथि सुधारने पर जल्द करना होगा काम।

5. दोनों देशों को मतभेदों को भुलाकर पहले की तरह रिश्तों को सुधरना चाहिए।