चुनाव आयोग मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। बता दें कि प्रदेश में 10 मार्च को कांग्रेस के 22 विधायक पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। 

नई दिल्ली/भोपाल. चुनाव आयोग मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। बता दें कि प्रदेश में 10 मार्च को कांग्रेस के 22 विधायक पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद 12 जुलाई को बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और 17 जुलाई को नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कसडेकर भी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे।

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15 महीने ही चली थी कमलनाथ की सरकार

मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार 15 महीने ही चली थी। इसी साल मार्च में प्रदेश में काग्रेस की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। दो विधायकों का निधन हो गया था।

जानिए कैसे एक के बाद एक खाली हुईं 28 विधानसभा सीट

मध्य प्रदेश में सियासी संकट की शुरुआत 10 मार्च को हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई। इसके बाद जुलाई में बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कसडेकर भी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। फिर मांधाता विधायक ने भी कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। इसके अलावा 3 विधायकों का निधन हो गया। यानी कुल 28 विधानसभा सीटें खाली हो गईं।

मध्य प्रदेश विधानसभा की स्थिति

पार्टी सीटें

भाजपा 107

कांग्रेस 88

बसपा 2

सपा 1

निर्दलीय 4

खाली सीटें 28

कुल सीटें 230

मध्य प्रदेश में सीटों का गणित

मध्‍य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। बहुमत के लिए 116 सीट की जरूरत होगी। शिवराज सिंह चौहान सरकार के पास 107 विधायक हैं। जबकि कांग्रेस के पास 88 विधायक हैं। बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए भाजपा को कम से कम नौ सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। इस उपचुनाव में 16 सीट ग्वालियर-चंबल में हैं। 

सरकार बनाने के लिए किस पार्टी को कितनी सीट की जरूरत?

मध्य प्रदेश की कुल 230 सीटों में से बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होगी। अगर भाजपा को सत्ता में बने रहना है तो उसे कम से कम 9 सीटों पर जीत हासिल करने होगी। वहीं कांग्रेस को सत्ता में वापस आने के लिए 20 या उससे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करना होगा।

साल 2018 में विधानसभा चुनाव में वोट शेयर का ग्राफ

साल 2018 में विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीट मिली थी