नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया को फिर से परिभाषित करने के लिए एक विधेयक पेश किया है। विधेयक चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए एक केंद्रीय मंत्री को शामिल करने का सुझाव देता है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023 पेश किया है। इस विधेयक द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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यह बिल संसद से पास होता है तो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट और भारत के चीफ जस्टिस का दखल खत्म हो जाए। इसके साथ ही सरकार की ताकत भी बढ़ेगी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति से CJI (Chief Justice of India) को हटाने का सुझाव दिया गया है। उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को चयन समिति में शामिल किया जाएगा। इससे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सरकार का कंट्रोल बढ़ जाएगा।

ये तीन लोग होंगे चयन समिति में शामिल

1- प्रधानमंत्री, चयन समिति के अध्यक्ष होंगे।

2- लोकसभा में विपक्ष के नेता

3- प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए केंद्रीय मंत्री

ऐसे होगा नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति

विधेयक के अनुसार नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में एक खोज समिति बनाई जाएगी। इसमें दो सदस्य होंगे। वे भारत सरकार के सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी नहीं होंगे। यह समिति पांच योग्य लोगों के नाम की लिस्ट तैयार करेगी। इस लिस्ट को पीएम की अध्यक्षता वाली चयन समिति को भेजा जाएगा। चयन समिति नए चुनाव आयुक्त का चुनाव करेगी।

मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था फैसला

इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने फैसला सुनाया कि चुनाव आयुक्तों का चयन प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक समिति द्वारा किया जाना चाहिए, जब तक कि संसद चयन प्रक्रिया तय करने वाला कानून नहीं बना लेती। जस्टिस केएम जोसेफ के नेतृत्व में दिए गए इस निर्देश का उद्देश्य चुनाव आयुक्तों की स्वायत्तता को अनुचित प्रभाव से बचाना था। जस्टिस जोसेफ ने लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए स्वतंत्र चुनाव आयोग के महत्व को रेखांकित किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है। इसके कार्य राजनीतिक दल के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।