किसान नेता राकेश टिकैत ने घोषणा की कि शीतकालीन सत्र शुरू होने पर सोमवार को 60 से अधिक ट्रैक्टर और 1,000 से अधिक लोग संसद तक मार्च करेंगे।

नई दिल्ली। किसानों ने अपने 'संसद चलो', या 'संसद तक मार्च' (Sansad March) कार्यक्रम को टाल दिया है। शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा (Sanyukt Kisan Morcha) ने इसका ऐलान किया है। केंद्र सरकार के संसद (Parliament) में कानून (Farm Laws) को निरस्त करने के वादे के बाद किसानों ने यह निर्णय लिया है।
संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग के बाद किसान नेता डॉ दर्शन पाल (Dr. Drashan Pal) ने शनिवार को बताया कि हम 29 नवंबर को होने वाला 'संसद मार्च' स्थगित कर रहे हैं। सरकार ने हमसे वादा किया है कि 29 तारीख को संसद में कानून निरस्त कर दिए जाएंगे।

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किसानों ने लिखा है प्रधानमंत्री को पत्र

किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री को लिखा, जिसमें हमने कई मांगें कीं। हमने मांग की कि किसानों के खिलाफ मामले रद्द किए जाएं। एमएसपी की गारंटी दी जाए। इस आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए। पराली जलाने पर केस किए जाने सहित बिजली बिलों को रद्द किया जाना चाहिए।

किसान चार दिसंबर तक करेंगे इंतजार

दर्शन पाल ने कहा, "हम चार दिसंबर तक इंतजार करेंगे... इसके बाद हम अपनी अगली कार्रवाई की घोषणा करेंगे।"

29 को किसानों ने किया था ट्रैक्टर रैली का आह्वान

इस सप्ताह की शुरुआत में किसान नेता राकेश टिकैत ने घोषणा की कि शीतकालीन सत्र शुरू होने पर सोमवार को 60 से अधिक ट्रैक्टर और 1,000 से अधिक लोग संसद तक मार्च करेंगे।

किसान आंदोलन को देखते हुए तीनों कानून वापसी 

उधर, सरकार ने कहा है कि संसद में पिछले साल पारित तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए एक विधेयक सोमवार को कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर द्वारा पेश किया जाएगा। इस दौरान बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को पहले दिन अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है।

कृषि मंत्री ने किया किसानों को आंदोलन वापस करने की अपील

शनिवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से अपना आंदोलन समाप्त करने का आग्रह करते हुए कहा कि अब आंदोलन का कोई मतलब नहीं रह गया है। सरकार कानूनों को खत्म करने के लिए सहमत हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के मुद्दों पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा और सरकार ने विभिन्न मांगों को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने एमएसपी या न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा करने वाले बिल का कोई विशेष संदर्भ नहीं दिया, जो कि विरोध करने वाले किसानों की मुख्य मांग बनी हुई है। बता दें कि पिछले हफ्ते प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा करते कहा था कि कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाएगा। पीएम ने किसानों से माफी मांगते हुए उनसे घर वापस लौटने की अपील की थी।

एक साल से हजारों किसान दिल्ली बार्डर्स पर डेरा हैं डाले

तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर पिछले एक साल से हजारों किसान दिल्ली के विभिन्न बार्डर्स पर डेरा डाले हुए हैं। सर्दी, गर्मी बरसात और हजारों विरोध व उत्पीड़न के बावजूद किसान यहां जमे रहे। किसान केवल यह कहते रहे कि जब तक कानून औपचारिक रूप से निरस्त नहीं हो जाते और एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साल भर से अधिक समय से चल रहे किसानों के विरोध ने देश और दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं। किसानों ने तर्क दिया था कि कानून उन्हें कॉर्पोरेट हितों की दया पर छोड़ देंगे, और उन्हें डर था कि यह सूखे या आपदा के समय, विशेष रूप से छोटे और सीमांत भूमिधारकों के लिए महत्वपूर्ण एमएसपी के अंत का कारण बनेगा। किसान आंदोलन के एक साल पूरा होते-होते सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा और कानूनों को रद्द करने का ऐलान हो गया। 

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