देश में गज़वा-ए-हिंद के लिए दारुल उलूम देवबंद ने कथित तौर पर फतवा जारी किया है। दारुल उलूम देवबंद, देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था है। इस मदरसा में इस्लामिक स्कॉलर्स धर्म  से जुड़े आदेश उपदेश जारी करते हैं।

Ghazwa-e-Hind: देश में गज़वा-ए-हिंद के लिए दारुल उलूम देवबंद ने कथित तौर पर फतवा जारी किया है। दारुल उलूम देवबंद, देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था है। इस मदरसा में इस्लामिक स्कॉलर्स धर्म का उपदेश जारी करते हैं। गज़वा-ए-हिंद, कथित तौर पर भारत पर जेहादी हमला और इस्लामिक देश में तब्दील करने के लए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है। यह कथित तौर पर भारत पर आक्रमण के संदर्भ में शहादत का महिमामंडन करता है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने एसएसपी सहारनपुर को निर्देश दिया है कि दारुल उलूम देवबंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर तीन दिनों में रिपोर्ट करें।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था

दारुल उलूम देवबंद देश में कई मदरसे चलाने वाली सबसे बड़ी इस्लामी संस्था है। दारुल उलूम से जुड़े मदरसे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में चल रहे हैं। इन मदरसों में लाखों बच्चे शिक्षा लेने के साथ धार्मिक गतिविधियों के लिए तैयार किए जाते हैं।

NCPCR ने लिया स्वत: संज्ञान, कार्रवाई की मांग की

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। एनसीपीसीआर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल एक्शन के लिए आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि गज़वा-ए-हिंद फतवा का मतलब भारत पर आक्रमण है। यानी देश विरोधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि गज़वा-ए-हिंद के दौरान मारे जाने पर महान शहीद की उपाधि मिलेगी। सहारनपुर जिले के एसएसपी लिखे लेटर में आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि देवबंद की वेबसाइट पर प्रकाशित एक फतवा के संबंध में आयोग को काफी चिंता है।

फतवा देश के बच्चों में नफरत पैदा कर रहा, केस दर्ज हो

एनसीपीसीआर ने डीएम और एसएसपी को लिखे अपने पत्र में कहा: इस तरह के फतवे बच्चों में अपने ही देश के खिलाफ नफरत पैदा कर रहे हैं और अंततः उन्हें अनावश्यक मानसिक या शारीरिक पीड़ा पहुंचा रहे हैं। यह किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 का उल्लंघन है।

एनसीपीसीआर ने अधिकारियों से भारतीय दंड संहिता और किशोर न्याय अधिनियम 2015 की प्रासंगिक धाराओं के तहत दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा है। आयोग ने तीन दिनों के भीतर की गई कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया।

यह भी पढ़ें:

मणिपुर में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने पर नहीं होगा विचार, हाईकोर्ट ने अपना आदेश लिया वापस