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बाली में G20 summit: ऐसे मिले मोदी और बिडेन, खाद-खाद्य और रूस-यूक्रेन युद्ध पर कही ये बड़ी बात

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित दुनिया भर के नेता, 17वें समूह 20 (जी20) शिखर सम्मेलन(G20) Summit) के लिए इंडोनेशिया में एकत्रित हुए हैं। समिट बाली शहर में हो रही है। G20 शिखर सम्मेलन 15-16 नवंबर दो दिन चलेगा।

G20 summit in Indonesia, global growth, food and energy security, environment, health, and digital transformation are the main topics, PM Modi is also present kpa
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First Published Nov 15, 2022, 7:41 AM IST

बाली(Bali-Indonesia). प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित दुनिया भर के नेता, 17वें समूह 20 (जी20) शिखर सम्मेलन(G20) Summit) के लिए इंडोनेशिया में एकत्रित हुए हैं। समिट बाली शहर में हो रही है। G20 शिखर सम्मेलन 15-16 नवंबर दो दिन चलेगा। मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और G-20 शेरपा अमिताभ कांत भी मौजूद हैं। जानिए आगे क्या...

मोदी ने दी ये सलाह
G20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने यूक्रेन-रूस युद्ध कहा कि भारत ने हमेशा से कहा है कि हमें यूक्रेन में युद्धविराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का रास्ता खोजना होगा। मोदी ने दूसरे विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली सदी में इसने दुनिया में कहर बरपाया था। इसके बाद तबके नेताओं ने शांति का रास्ता अपनाने का गंभीर प्रयास किया था।आज हमारी बारी है।

G-20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने सलाह दी कि कि आज खाद की कमी कल का खाद्य संकट है। इसका हल दुनिया के पास नहीं है। इससे निपटने खाद और खाद्यान्न दोनों की आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर और सुनिश्चित बनाए रखने के लिए आपसी समझौता करना चाहिए। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास के लिए भारत की ऊर्जा-सुरक्षा अहम है। मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, इसलिए ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी प्रतिबंध को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

फर्स्ट सेशन से पहले PM मोदी और जो बाइडेन एक-दूसरे से मिलकर खुश नजर आए। बाइडेन ने मोदी के कंधे पर हाथ रखा था, तो मोदी उनका हाथ थामे दिखे। इस बीच किसीबात पर दोनों ठहाके लगाते हुए मीटिंग की ओर बढ़ गए। वहां, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भी दिखे।, तब मैक्रों की नजर मोदी पर नहीं पड़ी थी। मोदी ने मैक्रों को बुलाकर हाथ मिलाया।

G20 शिखर सम्मेलन में  मोदी ने "खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा" पर सम्मेलन के सत्र को संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक नेताओं से यह कहा कि कोविड के बाद की अवधि के लिए "एक नई विश्व व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी" सबके कंधों पर है। इससे पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने शिखर सम्मेलन स्थल पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया।

यूक्रेन संकट को हल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघर्षविराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया और रियायती रूसी तेल और गैस ऊर्जा आपूर्ति पर किसी तरह के प्रतिबंध का विरोध किया। 

जी-20 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी, यूक्रेन के घटनाक्रम और इससे जुड़ी वैश्विक समस्याओं ने दुनिया में कहर बरपाया है और अफसोस जताया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है। 

भारत की आगामी जी-20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए, मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि जब समूह के नेता "बुद्ध और गांधी की पवित्र भूमि में मिलेंगे, हम सभी दुनिया को शांति का एक मजबूत संदेश देने के लिए सहमत होंगे।"

खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर सत्र में बोलते हुए, प्रधान मंत्री ने वैश्विक समस्याओं के निहितार्थ पर प्रकाश डाला और कहा कि पूरी दुनिया में आवश्यक और आवश्यक वस्तुओं का संकट है और आज हर देश के गरीब नागरिकों के लिए अधिक गंभीर चुनौती है।

मोदी ने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर सत्र में कहा, "हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी प्रतिबंध को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए।" 

जो बिडेन और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का प्रतिनिधित्व करने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल हुए।

मोदी ने कहा, "पूरी दुनिया में आवश्यक वस्तुओं का संकट है। हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौती अधिक गंभीर है। उनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी पहले से ही एक संघर्ष थी। गरीबों के पास दोहरी मारसे निपटने की वित्तीय क्षमता नहीं है। दोहरी मार के कारण, उनके पास इसे संभालने के लिए वित्तीय क्षमता का अभाव है। हमें यह स्वीकार करने में भी संकोच नहीं करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थान इन मुद्दों पर असफल रहे हैं।" 

प्रधान मंत्री ने महामारी के दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। "महामारी के दौरान भारत ने अपने 1.3 अरब नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही, कई देशों को ज़रूरत के हिसाब से खाद्यान्न की आपूर्ति भी की गई।"
 
 

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पढ़िए कुछ डिटेल्स...
शिखर सम्मेलन का विषय 'एक साथ जुटें, मजबूत हो जाएं(Recover Together, Recover Stronger) और अन्य विषयों के साथ ग्लोबल इकोनॉमिक रिकवरी, ग्लोबल हेल्थ आर्किटेक्चर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, सस्टेनेबल एनर्जी और क्लामेट चेंज पर फोकस है। सोमवार(14 नवंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस(UN Secretary-General Antonio Guterres) ने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। जलवायु परिवर्तन को युग का डिफाइनिंग चैलेंस बताते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु एकजुटता समझौता(climate solidarity pact) पेरिस समझौते में उल्लिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुकूल है। उन्होंने कहा, "जी20 के नेता जलवायु एकजुटता समझौते को बना या बिगाड़ सकते हैं।"

मोदी ने जाने से पहले कहा था
इंडोनेशिया रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि वह वैश्विक चिंता के प्रमुख मुद्दों, जैसे ग्लोबल ग्रोथ, फूड एंड एनर्जी सिक्योरिटी, पर्यावरण, स्वास्थ्य और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को पुनर्जीवित(reviving) करने के लिए अन्य G20 नेताओं के साथ व्यापक चर्चा करेंगे। मोदी ने कहा था-"जी20 शिखर सम्मेलन से इतर मैं कई अन्य प्रतिभागी देशों के नेताओं से मुलाकात करूंगा और उनके साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा करूंगा।"

बता दें कि प्रधान मंत्री मोदी इंडोनेशिया में जी20 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और उन्हें भारत की उभरती जी-20 प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी देंगे। यह G20 शिखर सम्मेलन विशेष रूप से विशेष है, क्योंकि भारत 1 दिसंबर 2022 से एक साल के पीरियड के लिए G20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा। 

G20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। यह सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और विकासात्मक मुद्दों पर ग्लोबल आर्किटेक्चर और गवर्नेंस को आकार देने और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत के लिए बाली शिखर सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री 16 नवंबर को बाली से प्रस्थान करेंगे।

जानिए  G-20 के बारे में

G-20 अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(International Monetary Fund) और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों के साथ 19 देशों तथा यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है।

ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (G20) दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। G20 सभी महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करता है। यह विश्व सकल घरेलू उत्पाद का 80%, वैश्विक व्यापार का 75% और विश्व की 60% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

हाल ही में विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs- MEA) ने घोषणा की कि भारत वर्ष 2023 में नई दिल्ली में G-20 समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

बता दें कि यह मंच 1999 में बनाया गया था। G20 फाइनेंसियल और इकोनॉमिक इश्यूज पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक मुख्य फोरम है। इसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। सदस्य देश हैं-अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।

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