NGT ने बताया है कि पूरे पश्चिम बंगाल में गंगा नदी का पानी नहाने लायक भी नहीं है। बिना ट्रीटमेंट के सीवेज का पानी नदी में बहाने से यह स्थिति हुई है।

नई दिल्ली। NGT (National Green Tribunal) ने पूरे पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के पानी को स्नान करने के लिए अनफिट बताया है। इसका मतलब है कि पानी इतना गंदा है कि नहाने के लायक नहीं है। गंगा नदी की यह दुर्दशा सीवेज के पानी को बिना ट्रीटमेंट के गिराने के चलते हुई है। NGT ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है।

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गंगा नदी के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का हाई लेवल मिला है। यह बैक्टीरिया मल में पलता है। NGT ने बताया है कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी में रोज 258.67 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज सीधे बहाया जा रहा है। इससे गंगा नदी में स्नान करने वालों और नदी के किनारे रहने वालों के स्वास्थ्य को लेकर जोखिम पैदा हो गया है।

बता दें कि NGT पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाला न्यायिक निकाय है। गंगा नदी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है। विभिन्न राज्यों में गंगा नदी में फैलाए जाने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए NGT द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के संबंध में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल में गंगा में प्रदूषण की स्थिति को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई। एनजीटी पहले के निर्देशों के जवाब में पश्चिम बंगाल द्वारा पेश किए गए रिपोर्ट की समीक्षा कर रहा है।

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NGT ने दी जुर्माना लगाने की चेतावनी

NGT पीठ के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नादिया, मालदा, हुगली, पूर्व बर्दवान, हावड़ा, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना सहित पश्चिम बंगाल के कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा दायर रिपोर्टों की जांच करने के बाद गहरी चिंता व्यक्त की। NGT ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि वे गंगा में बिना ट्रिटमेंट के सीवेज बहाना बंद नहीं करेंगे तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

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