केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए तैयार है। वहां चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए तैयार है। वहां चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राज्य में चुनाव कब होंगे। इसपर केंद्र सरकार ने जवाब देने के लिए 31 अगस्त तक का वक्त मांगा था। राज्य में पहले स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे। इसके बाद विधानसभा के चुनाव कराए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में किसी भी समय चुनाव के लिए तैयार है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 2018 की तुलना में 2023 में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 45.2 फीसदी की कमी आई है। घुसपैठ की घटनाएं 90 फीसदी घट गईं हैं। 

जम्मू-कश्मीर में सुधरी कानून-व्यवस्था की स्थिति
सरकार ने कोर्ट में कहा कि जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। पथराव जैसी घटनाएं 97 फीसदी तक कम हो गईं हैं। सुरक्षाकर्मियों को होने वाले नुकसान में भी 65 फीसदी की कमी आई है। 2018 में पथराव की 1,767 घटनाएं हुईं थी जो अब नगन्य हो गईं हैं। 2018 में 52 बार राज्य में बंद बुलाया गया था। 2023 में एक बार भी बंद नहीं हुआ।

अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के खिलाफ याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार ने 5000 लोगों को घर में नजरबंद कर दिया है। धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट बंद कर दिया गया है। स्थिति ऐसी है कि लोग हॉस्पिटल तक नहीं जा सकते। लोकतंत्र का मजाक न उड़ाएं और बंद के बारे में बात न करें।

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5 अगस्त 2019 को अनु्च्छेद 370 हुआ था खत्म
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनु्च्छेद 370 को 5 अगस्त 2019 को हटा दिया गया था। राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त कर इसे उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया था। इसके अलावा उसी समय अनुच्छेद 35ए भी समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद से राज्य में चुनाव नहीं हुए हैं।

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