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2019 लोकसभा चुनाव में संभाली थी चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी, दिया था 'मोदी है तो मुमकिन का नारा'

बीजेपी के कद्दावर नेता रहे अरुण जेटली का निधन शनिवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया है। पार्टी के सबसे मुखर नेता रहे अरुण जेटली एक अच्छे वक्ता थे। उन्होंने देश के रक्षामंत्री से लेकर वित्तमंत्री का कार्यभार संभाला। उनका जाना बीजेपी के लिए बड़ा नुकसान है। 
 

handled the responsibility of campaigning in the 2019 Lok Sabha elections
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New Delhi, First Published Aug 25, 2019, 9:21 AM IST
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नई दिल्ली. बीजेपी के कद्दावर नेता रहे अरुण जेटली का निधन शनिवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया है। पार्टी के सबसे मुखर नेता रहे अरुण जेटली एक अच्छे वक्ता थे। उन्होंने देश के रक्षामंत्री से लेकर वित्तमंत्री का कार्यभार संभाला। उनका जाना बीजेपी के लिए बड़ा नुकसान है। 


मोदी है तो मुमकिन का दिया था

जेटली ने 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी है तो मुमकिन का नारा दिया। बिहार में बीजेपी और जेडीयू से गठबंधन में उनकी बड़ी भूमिका रही। वह हमेशा मीडिल क्लास के समर्थक रहे। संसद में अपनी मुखरता को लेकर चर्चा में रहते थे। संघर्ष के दौर में उन्होंने पार्टी में संकटमोचक की भूमिका निभाई। वह सबको साथ लेकर चलने वाले नेता थे। 

2019 में संभाली चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी
अरुण जेटली के बीजेपी में बड़ी भूमिका था। उन्होंने कभी चुनाव नहीं जीता। वे सिर्फ एक बार लोकसभा चुनाव लड़े और हार गए। उन्हें पार्टी राज्यसभा में भेजती रही। गुजरात चुनाव के प्रभारी रहे। 2019 लोकसभा चुनाव में भी प्रचार अभियान की जिम्मेदारी जेटली को ही सौंपी गई थी।

लंबे समय तक रहे वकील

अरुण जेटली ने साल 1977 में वकालत की शुरूआत की थी। सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश के हाईकोर्ट में उन्होंने वकालत की। 1990 में उन्हें अधिकवक्ता बनाया गया। 1989 में बीपी सिंह सरकार में सॉलिसिटर बनाए गए। बोफोर्स की कागजी कार्रवाई उन्होंने की। लालकृष्ण अडवाणी, शरद यादव और माधवराव सिंधिया जैसे बड़े नेताओं के वकील रहे। उन्होंने समसमायिक मुद्दो पर कई लेख लिखे।  भारत ब्रिटिश कानूनी फोरम के समक्ष भारत में भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित कानून पर एक पेपर प्रस्तुत किया था। 1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में भारत सरकार के प्रतिनिधि रहे थे। उन्होंने जहां ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानूनों को मंजूरी दी। 


मंत्री रहकर भी लड़ा केस
केंद्र में मंत्री होने के बावजूद उन्होंने साल 2002 में केस लड़ा था। उन्होंने एक ऐसे मामले में पेप्सी का केस लड़ा, जिसमें भारत सरकार ने आठ कंपनियों पर जुर्माना लगाया था। 2004 में जेटली राजस्थान हाई कोर्ट में कोका कोला कंपनी के वकील के रूप में पेश हुए।

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