नई दिल्ली. कोरोना वायरस के संक्रमण से लोग डरे हुए हैं। मौत के बढ़ते आंकड़े देख संक्रमण से बचने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मौत के इस डर और दहशत के बीच ऐसी भी कहानियां हैं, जिनके हीरो ऐसे हैं, जो मौत से नहीं डरे। उन्होंने अपने हिस्से की जिंदगी दूसरों को दे दी। इनकी कहानियां आपका दिल जीत लेंगी। पहली कहानी बेल्जियम की एक 90 साल की महिला की है। दूसरी कहानी इटली के एक प्रीस्ट की है। 

पहली कहानी, जब 90 साल की सुजैन हुईं कोरोना पॉजिटिव
बेल्जियम में रहने वाली 90 साल की सुजैन होयलेट्स। बेटी  जूडिथ ने देखा की कुछ दिनों से मां कम खाना खा रही हैं। सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। बेटी को शक हुआ कि कहीं कोरोना वायरस की वजह से तो ऐसा नहीं हो रहा है। वह मां को लेकर हॉस्पिटल पहुंची। टेस्ट हुआ तो मां सुजैन कोरोना पॉजिटिव पाई गईं।

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इलाज के लिए मां को अलग रख दिया गया
कोरोना पॉजिटिव आने पर मां सुजैन को बेटी जूडिथ से अलग रख दिया गया। डॉक्टर्स 90 साल की सुजैन के इलाज में लग गए। लेकिन धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उनकी जान बचाने के लिए वेंटिलेटर पर रखने की योजना बनाई ही जा रही थी कि सुजैन ने वेंटिलेटर पर जाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं मरना पसंद करूंगी लेकिन वेंटिलेटर पर नहीं जाऊंगी। इसके पीछे उन्होंने बड़ी वजह बताई।

युवाओं को बचाएं, मैंने तो अपनी जिंदगी जी ली
सुजैन ने डॉक्टर्स से कहा, मैं वेंटिलेटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहती हूं। युवा रोगियों को बचाएं। मैंने तो अपनी जिंदगी जी ली है। 22 मार्च को सुजैन का निधन हो गया। 

दूसरी कहानी, इटली के पादरी ने मौत को लगाया गले, वेंटिलेटर पर नहीं गए 
सुजैन की तरह ही इटली के एक पादरी ने भी वेंटिलेटर के इस्तेमाल से मना कर दिया। यूएसए टुडे की एक रिपोर्ट में बतााय गया कि 72 साल के इटली के पादरी डॉन गिउसेप बर्नाडेली ने मरना पसंद किया, लेकिन वेंटिलेटर पर जाने से मना कर दिया। उनका मानना था कि वेंटिंलेर का इस्तेमाल किसी युवा को बचाने में किया जाए। 15 मार्च को पादरी डॉन गिउसेप का निधन हो गया।  जब बर्नाडेली के ताबूत को दफनाया जा रहा था, तब वहां अपने घर की खिड़कियों और दरवाजों के सामने आकर इनके त्याग की तारीफ कर रहे थे।

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